उच्चतम न्यायालय नये ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी
उच्चतम न्यायालय नये ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ‘ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और उसके नियमन से जुड़े कानून’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं की अंतिम सुनवाई करने को लेकर बुधवार को सहमति जताई।
ऑनलाइन गेमिंग का संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 इस वर्ष एक मई को लागू हुआ था।
शीर्ष अदालत ने ‘जवाबदेही और क्रमिक बदलाव केंद्र’ (सीएएससी) की ओर से दायर उस जनहित याचिका (पीआईएल) की भी सुनवाई को लेकर सहमति जताई, जिसमें केंद्र सरकार को ऐसे ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी मंच पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जो कथित तौर पर सोशल और ‘ई-स्पोर्ट्स गेम’ की आड़ में चलाए जा रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित सभी पक्षों के वकीलों से कहा कि वे इस बीच अपनी दलीलें और कागजी कार्रवाई पूरी कर लें।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, सीएएससी की ओर से पेश वकील विराग गुप्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने केंद्र से 17 अक्टूबर, 2025 को उनकी याचिका पर जवाब देने को कहा था।
उन्होंने बताया कि 2,000 ‘गेमिंग ऐप’ की एक सूची पीठ और केंद्र को सौंपी गई थी; ये ऐप कानून के बावजूद भारत में सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियां चला रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो आदेशों के बावजूद, सरकार ने अभी तक याचिका पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया है।
सीएएससी ने कई मंत्रालयों, यथा- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना और प्रसारण, वित्त, और युवा मामले और खेल मंत्रालय, को निर्देश देने का अनुरोध किया है कि वे ‘ऑनलाइन गेमिंग का संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025’ के प्रावधानों और राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाए गए कानूनों की ऐसी व्याख्या करें जिससे ‘सोशल’ और ‘ई-स्पोर्ट्स गेम’ की आड़ में चल रहे ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी पर रोक लगाई जा सके।
सीएएससी का प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विक्रम सिंह और शौर्य तिवारी कर रहे हैं और दोनों ने शीर्ष अदालत से सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया है कि वह सट्टेबाजी और जुए के ऐप के बढ़ते चलन पर रोक लगाए। उनका दावा है कि ये ऐप देश भर में बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
डॉ. के. ए. पॉल एक मुख्य याचिकाकर्ता हैं, जिनकी याचिका में ‘ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और विनियमित करने वाले अधिनियम’ के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी गई है। यह अधिनियम एक मई, 2026 को लागू हुआ था।
यह अधिनियम सभी ‘ऑनलाइन रियल मनी गेम्स’ पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, चाहे उनमें कौशल की आवश्यकता हो या वे किस्मत पर आधारित हों।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

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