शीर्ष अदालत ने विश्वभारती विश्वविद्यालय के पास आवासीय परियोजना को मंजूरी दी

शीर्ष अदालत ने विश्वभारती विश्वविद्यालय के पास आवासीय परियोजना को मंजूरी दी

शीर्ष अदालत ने विश्वभारती विश्वविद्यालय के पास आवासीय परियोजना को मंजूरी दी
Modified Date: January 29, 2026 / 10:06 pm IST
Published Date: January 29, 2026 10:06 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विश्वभारती विश्वविद्यालय के पास एक व्यावसायिक आवासीय परियोजना के निर्माण को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी।

शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इस परियोजना को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने विवादित भूमि का जिक्र “खोई” (संरक्षित) के रूप में किया था, लेकिन पश्चिम बंगाल के राजस्व कानूनों के तहत “खोई” भूमि के नाम से कोई श्रेणी मौजूद नहीं है।

पीठ ने कहा कि “खोई” शब्द का जिक्र नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के लेखन से लिया गया प्रतीत होता है, जिन्होंने बीरभूम क्षेत्र में और उसके आसपास पाई जाने वाली एक विशिष्ट भूवैज्ञानिक संरचना का उल्लेख किया था, जो लौह से भरपूर लाल लेटराइट मिट्टी से बनी छोटी पहाड़ियों में हवा और पानी के कारण हुए प्राकृतिक क्षय एवं कटाव के कारण अस्तित्व में आई थी, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक नालों और घाटी जैसी भू-आकृतियों का निर्माण हुआ था।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने माना कि विश्वभारती विश्वविद्यालय के पास 0.39 एकड़ भूमि पर निजी डेवलपर आरसुदय प्रोजेक्ट्स की ओर से किया गया निर्माण संरक्षित भूमि की प्रकृति का है और “खोई” भूमि की श्रेणी में आता है।

पीठ ने आवासीय परियोजना के निर्माण की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा, “धोखाधड़ी, गलत बयानी या वैधानिक आवश्यकताओं के जानबूझकर उल्लंघन के किसी ठोस सबूत के अभाव में, ऐसी प्रक्रियात्मक चूक, यदि दलील के लिहाज से मान भी ली जाए, तो भी निर्माण को स्वतः अवैध नहीं ठहरा सकती, न ही यह विध्वंस के निर्देश जारी करने को उचित ठहरा सकती है, जो कि एक अत्यंत कठोर आदेश है और केवल स्पष्ट एवं ठोस उल्लंघन के मामलों के लिए आरक्षित है।”

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश


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