उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को अधिकरण से जुड़े सुधारों पर व्यापक प्रस्ताव सौंपने को कहा

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को अधिकरण से जुड़े सुधारों पर व्यापक प्रस्ताव सौंपने को कहा

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को अधिकरण से जुड़े सुधारों पर व्यापक प्रस्ताव सौंपने को कहा
Modified Date: February 16, 2026 / 07:22 pm IST
Published Date: February 16, 2026 7:22 pm IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अर्ध-न्यायिक निकायों के कामकाज में व्याप्त समस्याओं पर सोमवार को गौर किया और केंद्र सरकार को देश भर के सभी अधिकरणों के प्रबंधन के लिए चार सप्ताह के भीतर एक व्यापक और समान प्रस्ताव सौंपने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ मद्रास बार एसोसिएशन के काफी समय से लंबित मामले की सुनवाई कर रही थी, जो अधिकरणों की स्वतंत्रता और संरचनात्मक अखंडता पर केंद्रित है।

पीठ ने पदों के रिक्त रहने के संकट और सुव्यवस्थित विधायी ढांचे के अभाव पर चिंता व्यक्त की, जिसके कारण अधिकरण अक्सर अनिश्चितता की स्थिति में रहते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि सरकार को पूर्व न्यायिक आदेशों के अनुसार कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘संस्थाओं का कामकाज ठप न होने दें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चार सप्ताह के भीतर, सभी अधिकरणों के संबंध में एक समान प्रस्ताव हमारे समक्ष प्रस्तुत करें। सभी अधिकरणों के लिए एक समग्र योजना प्रस्तुत करें। भले ही आप कोई नया कानून या कोई नया संशोधन आदि लाना चाहते हों।’’

पीठ ने केंद्र को एक ‘‘समान प्रस्ताव’’ लाने को कहा, जो सभी अधिकरणों को समाहित करे, चाहे वे संविधान के तहत स्थापित हों या विशिष्ट कानूनों के तहत।

पीठ ने केंद्र से अपनी कार्ययोजना स्पष्ट करने को कहा, जिसमें यह भी शामिल हो कि क्या वह इन निकायों के कामकाज को जारी रखने जाने के लिए कोई नया कानून या व्यापक संशोधन लाने का इरादा रखता है।

अटॉर्नी जनरल ने तत्काल रिक्तियां नहीं होने देने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने प्रस्ताव किया कि मौजूदा अध्यक्षों के सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंचने तक या नयी चयन प्रक्रिया पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद पर बने रहने की अनुमति दी जाए।

पीठ ने सरकार को एक समग्र योजना तैयार करने को कहा और प्रमुख वित्तीय अधिकरणों के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया।

पीठ ने आदेश दिया कि न्यायमूर्ति राजेश खरे अगले आदेश तक ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण (डीआरएटी) के अध्यक्ष बने रहेंगे।

इसी प्रकार, अधिकरण का कामकाज ठप होने से बचाने के लिए डीआरएटी कोलकाता के अध्यक्ष को भी पद पर बने रहने के लिए सेवा विस्तार दिया गया।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


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