नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने खनन माफियाओं को रोकने के संबंध में वन रक्षकों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने समेत अन्य कड़े उपाय करने को कहा है।
न्यायालय ने इन राज्यों को प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और पर्यवेक्षण बुनियादी ढांचे की स्थापना और संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने इन गतिविधियों में शामिल वाहनों और मशीनरी तथा उनसे जुड़े मालिकों और ठेकेदारों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के लिए भी कहा।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रूप से खनन की गई रेत के परिवहन के लिए अपंजीकृत और बिना नंबर वाले वाहनों के इस्तेमाल से संबंधित मीडिया की हालिया खबरों का संज्ञान लिया।
पीठ ने मध्यप्रदेश की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी।
पीठ ने राजू से कहा, ‘‘अगर यह सही है, तो आपके अधिकारियों ने अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल किया है।’’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर तथ्य सही हैं, तो यह ‘‘चौंकाने वाला’’ है और इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
न्यायालय ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के लिए खतरा’ से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है, 5,400 वर्ग किलोमीटर में तीन राज्यों में फैला संरक्षित क्षेत्र है। दुर्लभ घड़ियाल (लंबी थूथन वाले मगरमच्छ) के अलावा, यह अभयारण्य लाल मुकुट छतरी कछुओं और लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन का भी निवास स्थान है।
शीर्ष अदालत ने मंगलवार को अवैध रेत खनन के मुद्दे से निपटने के लिए प्रभावी प्रवर्तन, संस्थागत जवाबदेही और निगरानी एवं निवारक उपायों को तत्काल लागू करने के संबंध में कई निर्देश जारी किए।
पीठ ने कहा, ‘‘राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने-अपने वन विभागों में क्षेत्रीय स्तर के प्रवर्तन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाएं, जिसमें वन रक्षकों के खाली पदों और अन्य कर्मियों की भर्ती करना शामिल है…।’’
न्यायालय ने कहा कि ऐसे पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए और ये राज्य यह सुनिश्चित करेंगे कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाए।
पीठ ने कहा, ‘‘राज्यों को प्रभावित क्षेत्रों में सीसीटीवी, एकीकृत निगरानी तंत्र, नियंत्रण केंद्र और संबद्ध तकनीकी ढांचा की स्थापना, संचालन के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे।’’
न्यायालय ने ड्यूटी के दौरान वन रक्षकों और अन्य पंक्ति के सुरक्षा कर्मियों पर बढ़ते हमलों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति से परामर्श करके, मध्यप्रदेश और राजस्थान को मुरैना-धौलपुर सीमा के पास जोड़ने वाले पुल पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी निगरानी कैमरे लगाएगा।
भाषा आशीष मनीषा
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