वेतन निर्धारण नियमों के खिलाफ पूर्व सैनिकों की याचिका न्यायालय ने खारिज की
वेतन निर्धारण नियमों के खिलाफ पूर्व सैनिकों की याचिका न्यायालय ने खारिज की
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पूर्व सैनिकों के एक समूह द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें मौजूदा वेतन-निर्धारण नियमों की वैधता को चुनौती दी गई थी।
समूह का आरोप था कि मौजूदा ढांचा सेना के उन पूर्व सैनिकों को अनुचित रूप से दंडित करता है जो सेवानिवृत्ति के बाद सिविल सेवाओं में शामिल होते हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने वकील अश्विनी उपाध्याय को इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी जो बदले में यथाशीघ्र निर्णय लेंगे।
पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता, जिनमें मुख्य याचिकाकर्ता बैद्य नाथ चौधरी भी शामिल हैं, असंतुष्ट हैं, तो वे अपनी शिकायतों के साथ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) से संपर्क कर सकते हैं।
चौधरी और पांच अन्य लोगों ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर उनकी याचिका में केंद्रीय सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2016 के नियम 8 और उसके बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 1 मई, 2017 के ज्ञापन का हवाला दिया था।
याचिकाकर्ताओं ने, जो सभी आयकर विभाग और भारतीय खाद्य निगम सहित विभिन्न सरकारी विभागों में भूमिकाएं संभालने से पहले अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों (पीबीओआर) के रूप में कार्यरत थे, कहा था कि मौजूदा नियम उन्हें उनके नए पदों के “न्यूनतम वेतन स्तर” पर शुरुआत करने के लिए मजबूर करते हैं।
याचिका में कहा गया था कि यह “यांत्रिक निर्धारण” सेना, नौसेना या वायु सेना में उनकी दशकों की सैन्य सेवा, पूर्व अनुभव और अंतिम वेतन को पूरी तरह से नजरअंदाज करता है।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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