न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा उपायों के अनुपालन के लिए कार्यबल गठित करने की याचिका खारिज की

न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा उपायों के अनुपालन के लिए कार्यबल गठित करने की याचिका खारिज की

न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा उपायों के अनुपालन के लिए कार्यबल गठित करने की याचिका खारिज की
Modified Date: April 9, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: April 9, 2026 8:51 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें पूरे देश में खाद्य सुरक्षा उपायों को लागू करने और उनकी प्रभावी निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय कार्य बल या समिति बनाने का अनुरोध किया गया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, ‘‘हमें भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस रिट याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं मिला। इसलिए, इसे खारिज किया जाता है।’’

पीठ ने उस याचिका पर अपना आदेश सुनाया, जिसमें अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वे पूरे देश में एक समय-सीमा के भीतर खाद्य सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण अभियान चलाएं, जिसमें खाद्य निर्माण और प्रसंस्करण इकाइयां, रेस्तरां, व्यावसायिक खाद्य प्रतिष्ठान और अन्य शामिल हों।

छह अप्रैल को याचिका पर सुनवाई करते हुए, पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि इस जनहित याचिका (पीआईएल) को दायर करने से पहले, उपदेशों के अलावा, उन्होंने क्या शोध किया है।

याचिकाकर्ता, जो व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए थे, ने कहा कि यह पीआईएल एक ऐसे मुद्दे को उठाती है जो देश में लगभग हर किसी को प्रभावित करता है, और यह असुरक्षित, दूषित और खतरनाक भोजन से संबंधित है।

याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वे उच्चतम न्यायालय की देखरेख में एक राष्ट्रीय कार्य बल या समिति का गठन करें, ताकि पूरे देश में खाद्य सुरक्षा उपायों को लागू करने और उनकी प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

इस मामले में केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को प्रतिवादी बनाया गया था।

याचिका में प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निरीक्षण के बुनियादी ढांचे, परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रवर्तन कर्मियों को मजबूत करें।

इसमें खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के पीड़ितों के लिए पूरे देश में शिकायत निवारण और मुआवजे की व्यवस्था स्थापित करने की भी मांग की गई थी।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में