पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या पर न्यायालय ने जताई चिंता, ‘बड़ी मछलियों’ को पकड़ने के लिए कहा
पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या पर न्यायालय ने जताई चिंता, ‘बड़ी मछलियों’ को पकड़ने के लिए कहा
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर शुक्रवार को चिंता जताई और कहा कि इससे होने वाली मौत के मामले ‘खतरनाक’ हैं। न्यायालय ने राज्य में नशीले पदार्थों से निपटने के तरीके में बड़े बदलाव की जरूरत बताई।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाल की एक घटना का ज़िक्र किया जिसमें एक मां ने अपने सभी पांच बेटों को मादक पदार्थ की लत की वजह से खो दिया था।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘देखिए हमने क्या पढ़ा। एक मां रो रही है। उसने अपने पांचवे बेटे को मादक पदार्थों की वजह से खो दिया। उसने अपने सभी बच्चों को नशीले पदार्थों की लत की वजह से खो दिया… पुलिस को संवेदनशील बनाने की जरूरत है।’’
पीठ ने कहा कि मादक पदार्थों का खतरा उस स्तर पर पहुंच गया है जहां केंद्र सरकार का दखल जरूरी हो सकता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘शायद केंद्र सरकार के दखल की ज़रूरत हो सकती है। लेकिन जब वे दखल दें, तो यह न सोचें कि केंद्र हस्तक्षेप कर रहा है।’’
उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों की एजेंसियों से मादक पदार्थों के खतरे को खत्म करने के एक ही लक्ष्य की ओर काम करने को कहा।
उन्होंने कहा, ‘‘साझा लक्ष्य मादक पदार्थों के खतरे को रोकना होना चाहिए।’’
पीठ ने राज्य पुलिस से इस बात के लिए भी नाखुशी जताई कि वे ‘प्रचार’ के लिए छोटे स्तर के अपराधियों पर ध्यान दे रही है, जबकि बड़े तस्करों को खुला छोड़ दिया जा रहा है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘बड़ी मछलियों या असरदार लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि लुधियाना ऐसे धंधे का सेंटर है।
पीठ ने स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज बहुत सारे लंबित मामलों पर भी रोशनी डाली। इससे निपटने के लिए, उसने मुकदमों में तेजी लाने के लिए सभी राज्यों में एनडीपीएस अदालत बनाने में मदद करने का वादा किया।
भाषा वैभव अविनाश
अविनाश

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