नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राजमार्गों पर अतिक्रमण और खड़े होने वाले वाहनों के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को चिंता जताई और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूछा कि वह इससे निपटने के लिए कैमरा निगरानी प्रणाली और टोल प्लाजा पर निगरानी कक्ष क्यों नहीं स्थापित कर सकता।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ राजस्थान के फलोदी क्षेत्र में हुए एक हादसे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। पीठ ने कहा कि राजमार्गों पर अतिक्रमण और वाहनों को खड़ा करना दो प्रमुख समस्याएं हैं।
एनएचएआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि राजमार्गों पर अनधिकृत पार्किंग रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और गश्त करने संबंधी परिपत्र जारी किए गए हैं।
इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आप कैमरा निगरानी प्रणाली लगाने के बारे में क्यों नहीं सोच सकते? आप सभी टोल प्लाजा पर निगरानी कक्ष स्थापित कर सकते हैं।’’
मामले में ‘एमिकस क्यूरी’ के रूप में उच्चतम न्यायालय की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एन.एस. नाडकर्णी ने कहा कि प्रमुख समस्याओं में से एक राजमार्गों पर वाहनों की अवैध पार्किंग है, जिसके कारण सड़क हादसे होते हैं।
पीठ ने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने अभी तक इस मामले में अनुपालन हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं।
अदालत ने दोनों मंत्रालयों को अपने हलफनामे दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। पीठ ने मामले को छह अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया और तमिलनाडु सरकार को अगली सुनवाई की तारीख से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
पिछले साल नवंबर में, उच्चतम न्यायालय ने दो नवंबर को राजस्थान के फलोदी में हुए सड़क हादसे का स्वतः संज्ञान लिया था। इस हादसे में एक टेंपो ट्रैवलर खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गया था।
यह घटना भारत माला राजमार्ग पर मतोड़ा गांव के पास हुई थी, जब टेंपो ट्रैवलर बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रहा था।
उच्चतम न्यायालय ने 13 अप्रैल को कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि किसी भी भारी या वाणिज्यिक वाहन को राष्ट्रीय राजमार्ग की मुख्य सड़क या पक्के किनारे पर खड़ा करने या रोकने की अनुमति नहीं होगी, सिवाय इसके कि वह किसी निर्धारित पार्किंग स्थल, वाहन रोकने के लिए बनाई गई जगह या सड़क किनारे उपलब्ध सुविधा स्थल पर खड़ा किया गया हो।
भाषा आशीष नरेश
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