चिकित्सक की हत्या मामले में नौ लोगों को बरी करने का फैसला शीर्ष अदालत ने पलटा
चिकित्सक की हत्या मामले में नौ लोगों को बरी करने का फैसला शीर्ष अदालत ने पलटा
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) शीर्ष अदालत ने चेन्नई के प्रसिद्ध तंत्रिका विज्ञानी सुब्बैया की 2013 में दिन-दहाड़े हुई हत्या के मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के एक आदेश को मंगलवार को निरस्त कर दिया तथा इस सिलसिले में नौ लोगों की भूमिका के लिए उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
यद्यपि निचली अदालत ने मूल रूप से कई आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, लेकिन न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार के मृत्युदंड पर जोर न देने के फैसले को संज्ञान में लिया तथा फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
न्यायमूर्ति शर्मा ने 96 पन्नों के अपने फैसले की शुरुआत ‘‘लोभ की पराकाष्ठा’’ पर रवींद्रनाथ टैगोर के एक मार्मिक उद्धरण के साथ की।
चौदह सितंबर, 2013 को हुई हत्या, कन्याकुमारी में दो एकड़ भूमि के टुकड़े को लेकर एक दशक पुरानी रंजिश का परिणाम थी। डॉक्टर सुब्बैया का भूमि के स्वामित्व को लेकर आरोपी परिवार के सदस्यों के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। भूमि कब्जा से संबंधित प्रकोष्ठ के समक्ष कई शिकायतें दर्ज की गई थीं तथा आपराधिक कार्यवाही तथा कुछ आरोपियों द्वारा प्राप्त अग्रिम जमानत को रद्द करने के प्रयासों के बाद तनाव बढ़ गया था।
अभियोजन पक्ष ने सफलतापूर्वक साबित किया कि एक आरोपी के परिवार ने गुर्गों के साथ मिलकर चिकित्सक को ‘खत्म’ करने की साजिश रची थी, क्योंकि उनका मानना था कि सुब्बैया की मृत्यु से वे लोग संपत्ति पर कब्जा कर सकेंगे।
निचली अदालत ने 2021 में आरोपियों को दोषी पाया था और उनमें से सात को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। जून 2024 में, मद्रास उच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि को पूरी तरह से रद्द कर दिया और विभिन्न कारणों से सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय द्वारा आरोपियों के बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया, इसे एक ‘गंभीर त्रुटि’ बताया और निचली अदालत के दोषसिद्धि के निष्कर्षों को बहाल कर दिया।
भाषा सुरेश पवनेश
पवनेश

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