अनूप माझी को अग्रिम जमानत देने के खिलाफ ईडी की याचिका पर सुनवाई को शीर्ष अदालत तैयार
अनूप माझी को अग्रिम जमानत देने के खिलाफ ईडी की याचिका पर सुनवाई को शीर्ष अदालत तैयार
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय कथित अवैध कोयला खनन और चोरी से संबद्ध धनशोधन मामले में एक निजी कंपनी के निदेशक को मिली अग्रिम जमानत के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका की सुनवाई करने पर मंगलवार को राजी हो गया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कोयले की खरीद-बिक्री के कारोबार से जुड़ी कंपनी के निदेशक रहे अनुप माझी को नोटिस जारी कर ईडी की याचिका पर जवाब मांगा।
ईडी ने धनशोधन मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पिछले वर्ष जून में माझी को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती दी है। यह मामला 2020 में दर्ज किया गया था।
ईडी की ओर से उच्चतम न्यायालय में पेश होते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने अग्रिम जमानत रद्द करने का अनुरोध किया एवं दावा किया कि माझी 2,700 करोड़ रुपये के ‘‘घोटाले’’ का ‘‘मुख्य सरगना’’ है, जिसमें राष्ट्रीय संसाधनों की लूट हुई।
राजू ने दलील दी कि माझी लंबे समय तक फरार था।
इस पर पीठ ने पूछा, ‘‘वह (माझी) सीबीआई की हिरासत में था। तब आपने (ईडी ने) उसे (अपनी) हिरासत में क्यों नहीं लिया?’’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने मामले में राष्ट्रीय संसाधनों की लूट होने का दावा करते हुए माझी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला दिया।
पीठ ने पूछा, ‘‘क्या उसने (माझी ने) जांच में सहयोग किया है?’’
राजू ने कहा कि अदालत से संरक्षण मिलने के बाद माझी ने जांच में कुछ सहयोग किया।
माझी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया है और वह 13 बार जांच एजेंसी के समक्ष पेश हो चुका है।
पीठ ने ईडी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई सितंबर में तय की।
उच्च न्यायालय ने धनशोधन मामले में माझी की अग्रिम जमानत अर्जी पर यह आदेश पारित किया था।
उच्च न्यायालय में ईडी ने आरोप लगाया था कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के लीज क्षेत्र से अवैध कोयला खनन और चोरी के जरिये 2,742.32 करोड़ रुपये (कर एवं रॉयल्टी सहित) के कोयले का गबन किया गया।
माझी के वकील ने उच्च न्यायालय में दलील दी थी कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनके मुवक्किल कई बार जांच में शामिल हो चुके हैं और जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग किया है।
भाषा राजकुमार सुरेश
सुरेश

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