उच्चतम न्यायालय ने जमीन बिक्री मामले में अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
उच्चतम न्यायालय ने जमीन बिक्री मामले में अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय की सालबोनी जमीन घोटाला मामले में अग्रिम जमानत याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
आरोप हैं कि पश्चिम बंगाल की सरकारी जमीन को कथित तौर पर बेच दिया गया और बिक्री से मिली रकम पार्टी के खाते में जमा कराई गई।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने छह अगस्त के अपने उस पुराने आदेश को भी वापस ले लिया, जिसमें रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी।
न्यायालय के इस आदेश के बाद अब सुमित रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है।
पीठ ने रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद रॉय को राहत देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान शंकरनारायणन ने कहा कि रॉय को प्राथमिकी में आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्होंने रॉय से हिरासत में पूछताछ की अभियोजन पक्ष की याचिका का जोरदार विरोध किया।
पीठ ने रॉय से पूछताछ के संबंध में राज्य पुलिस द्वारा जमा की गई रिपोर्ट का अध्ययन किया था।
सॉलिसिटर जनरल ने पूछताछ के संबंध में एक ‘नोट’ जमा किया, जिसे याचिकाकर्ता के वकील के साथ साझा किया गया था।
उन्होंने कहा कि रॉय पूछताछ के दौरान टालमटोल करते रहे।
उन्होंने कहा कि रॉय से लगभग 88 घंटे पूछताछ हो चुकी है लेकिन उनका सामना उस सामग्री से नहीं कराया गया जिससे कथित लेनदेन में उनकी संलिप्तता प्रत्यक्ष रूप से साबित होती है।
शंकरनारायणन ने कहा कि रॉय से राजनीतिक दल के खाते में लेनदेन के बारे में पूछताछ की जा रही है जबकि पार्टी के खिलाफ आपराधिक मामला नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता से तृणमूल कांग्रेस के खाते में जमा धन के बारे में ही पूछा गया, ना कि उनके निजी खाते में या किसी रिश्तेदार अथवा सहयोगी के खाते में जमा धन के बारे में पूछा गया।’’
शंकरनारायणन ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खातों का ऑडिट किया गया था और जानकारी निर्वाचन आयोग को दी गई थी और संबंधित अवधि में पार्टी खाते में करीब 42.17 करोड़ रुपये जमा किए गए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर उन्हें लगता है कि इस जमा रकम में कुछ गलत है तो उन्हें पार्टी से सवाल पूछना चाहिए। इसका मेरे से कोई लेनादेना नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि रॉय का निजी बैंक खाता 2019 में ही खुला था और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जो सबसे अधिक राशि जमा की थी वह 60,000 रुपये थी।
हालांकि, न्यायमूर्ति बागची ने इस दलील पर सवाल किया कि रॉय का नकद जमा से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि बैंक स्टेटमेंट दिखाते हैं कि जमा की गई राशि रॉय से संबंधित पैन से जुड़ी थी।
न्यायमूर्ति बागची ने एक समय यह भी कहा कि पीठ रॉय को गिरफ्तारी से संरक्षण देकर बड़ी राहत दे रही है।
मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
सॉलिसिटर जनरल ने अंतरिम राहत का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि मामले की जांच के लिए रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने रॉय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
भाषा वैभव पवनेश
पवनेश

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