पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी पर उच्चतम न्यायालय में अंतिम सुनवाई फिर से शुरू

पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी पर उच्चतम न्यायालय में अंतिम सुनवाई फिर से शुरू

पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी पर उच्चतम न्यायालय में अंतिम सुनवाई फिर से शुरू
Modified Date: March 23, 2026 / 10:32 pm IST
Published Date: March 23, 2026 10:32 pm IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को वनशक्ति फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई फिर से शुरू की, जिसमें केंद्र और अन्य प्राधिकरणों को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माना लेकर पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) देने की अनुमति दी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की बात सुनी, जिन्होंने पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को दी गई पूर्वव्यापी कार्यकारी मंजूरी की वैधता को जोरदार चुनौती दी।

शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि इस तरह की “सामूहिक” व्यवस्था, जो बाद में मंजूरी देने की अनुमति देती है, संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करती है और उस कानूनी ढांचे के विपरीत है, जिसमें पहले से जांच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण कानून के तहत मंजूरी देने से पहले विचार-विमर्श जरूरी है, न कि उल्लंघन होने के बाद।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “पूर्वव्यापी मंजूरी की अवधारणा हमेशा से ही सीमित दायरे में लागू करने के लिए थी।”

उन्होंने केंद्र की 2017 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि यह केवल एक बार के लिए छह महीने की “माफी योजना” थी, जो अप्रैल 2018 तक ही लागू थी और केवल उन परियोजनाओं पर लागू थी, जो बिना मंजूरी के पहले से चल रही थीं।

उन्होंने कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को गुप्त प्रवेश द्वार नहीं बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस ढांचे का दुरुपयोग इसके निर्धारित दायरे से बाहर किया जा रहा है।

शंकरनारायणन ने चेतावनी दी कि इस तरह की स्वीकृतियों का पर्यावरणीय प्रभाव ‘बहुत बड़ा’ है और कई मामलों में ‘अपरिवर्तनीय’ है, विशेष रूप से पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में जो जल संसाधनों, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता पर निर्भर हैं।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि इस प्रकार की बाद में दी गई स्वीकृतियां पर्यावरण सुरक्षा उपायों को कमजोर करती हैं और उल्लंघन को बढ़ावा देती हैं। इस मामले की सुनवाई अनिर्णायक रही और मंगलवार को फिर से शुरू होगी।

मई 2025 में उच्चतम न्यायालय के वनशक्ति फैसले ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को उन परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोक दिया था, जो पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन करती पाई गई थीं।

भाषा रवि कांत रवि कांत दिलीप

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