उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा में निजी क्षेत्र में आरक्षण पर उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज किया

उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा में निजी क्षेत्र में आरक्षण पर उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज किया

उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा में निजी क्षेत्र में आरक्षण पर उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज किया
Modified Date: November 29, 2022 / 08:55 pm IST
Published Date: February 17, 2022 5:54 am IST

Supreme Court sets aside HIGH Court : नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के निवासियों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराने के प्रावधान वाले कानून पर अंतरिम रोक लगाने के हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय के आदेश को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने हरियाणा सरकार को नियोक्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश भी दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मामले के गुण-दोष से निपटने का इरादा नहीं है और हम उच्च न्यायालय से शीघ्र और चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का अनुरोध करते हैं। पक्षकारों को स्थगन का अनुरोध नहीं करने और सुनवाई की तारीख तय करने के लिए अदालत के सामने मौजूद रहने का निर्देश दिया जाता है।’’

उसने कहा, ‘‘इस बीच, हरियाणा को नियोक्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया जाता है। उच्च न्यायालय के जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसे खारिज किया जाता है, क्योंकि अदालत ने विधेयक पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कारण नहीं दिए हैं।’’

हरियाणा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के निवासियों को 75 फीसदी आरक्षण देने संबंधी हरियाणा सरकार के कानून पर तीन फरवरी को अंतरिम रोक लगा दी थी। इस फैसले को हरियाणा सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

उच्च न्यायालय ने फरीदाबाद के विभिन्न उद्योग संघों और गुरुग्राम सहित हरियाणा की कई अन्य संस्थाओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक का आदेश दिया था।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में