उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के भाजपा एमएलसी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई

उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के भाजपा एमएलसी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई

उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के भाजपा एमएलसी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई
Modified Date: May 19, 2025 / 09:37 pm IST
Published Date: May 19, 2025 9:37 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक की बेलगावी विधान परिषद में मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सी.टी. रवि के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर सोमवार को रोक लगा दी।

रवि के खिलाफ दिसंबर 2024 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75 (यौन उत्पीड़न) और 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने रवि की पैरवी कर रहे वकील की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही पर रोक लगा दी।

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भाजपा नेता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।

इस महीने की शुरुआत में, उच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि कथित टिप्पणी या इशारा वास्तव में शिकायतकर्ता – जो एक महिला है – के लिए किया गया था, तो इसे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के रूप में देखा जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश में रवि के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी और उनकी याचिका पर राज्य सरकार से जवाब भी मांगा।

रवि के वकील ने दलील दी कि चूंकि 19 दिसंबर 2024 को विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान कथित टिप्पणी की गई थी, इसलिए उनके मुवक्किल को संवैधानिक छूट प्राप्त है।

उनकी याचिका में कहा गया है कि सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत संसदीय सत्रों के दौरान और सत्रों के बाद 40 दिन तक सदस्यों की गिरफ्तारी पर रोक है।

रवि को स्थानीय पुलिस ने 19 दिसंबर को बेलगावी में सुवर्ण विधान सौध के परिसर से गिरफ्तार किया था।

भाषा खारी अविनाश

अविनाश


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