न्यायालय ने ‘ओआरओपी’ का बकाया किस्तों में भुगतान करने संबंधी परिपत्र को लेकर कड़ा रुख अपनाया

न्यायालय ने ‘ओआरओपी’ का बकाया किस्तों में भुगतान करने संबंधी परिपत्र को लेकर कड़ा रुख अपनाया

न्यायालय ने ‘ओआरओपी’ का बकाया किस्तों में भुगतान करने संबंधी परिपत्र को लेकर कड़ा रुख अपनाया
Modified Date: February 27, 2023 / 08:06 pm IST
Published Date: February 27, 2023 8:06 pm IST

नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सशस्त्र बलों के पात्र पेंशनभोगियों को ‘वन रैंक वन पेंशन’ (ओआरओपी) के बकाये की अदायगी में देरी को लेकर सोमवार को रक्षा मंत्रालय के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। साथ ही, भुगतान के लिए न्यायालय द्वारा तय की गई समयसीमा बढ़ाने के लिए एक परिपत्र जारी करने को लेकर संबद्ध सचिव से स्पष्टीकरण मांगा।

शीर्ष न्यायालय ने नौ जनवरी को सशस्त्र बलों के सभी पात्र पेंशनभोगियों को ‘ओआरओपी’ के कुल बकाये के भुगतान के लिए केंद्र को 15 मार्च तक की समयसीमा दी थी। लेकिन, 20 जनवरी को मंत्रालय ने यह परिपत्र जारी किया कि बकाया रकम का भुगतान चार वार्षिक किस्तों में किया जाएगा।

न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बरकरार रखने का उल्लेख करते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंत्रालय को खुद को व्यवस्थित करने को कहा और सचिव से अपना रुख स्पष्ट करते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा।

न्यायालय ने कहा, ‘‘हमने बकाये के भुगतान के लिए समय विस्तारित करते हुए 15 मार्च तक कर दिया था। अब नौ जनवरी के हमारे आदेशों के बाद, आप यह परिपत्र कैसे जारी कर सकते हैं कि आप चार समान किस्तों में रकम का भुगतान करेंगे? हम आपके सचिव के खिलाफ कार्रवाई क्यों न करें? हमारे आदेश के बाद, आप समय विस्तारित करने के लिए एक प्रशासनिक परिपत्र के लिए आदेश कैसे जारी कर सकते हैं।’’

पीठ में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आप अपने सचिव से कहें कि हम 20 जनवरी के परिपत्र को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने जा रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता को बरकरार रखना है। या तो सचिव इसे (परिपत्र को) वापस लें, अन्यथा हम रक्षा मंत्रालय को अवमानना नोटिस जारी करने जा रहे हैं और यह बहुत गंभीर बात होगी।’’

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि मंत्रालय को कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए था और भुगतान के लिए समय विस्तारित करने का एकपक्षीय तरीके से परिपत्र जारी नहीं करना चाहिए था।

न्यायालय ने कहा, ‘‘हमने 15 मार्च की समयसीमा तय की थी और आपको यह नहीं कहना था कि पैसा किस्तों में दिया जाएगा। यहां आप कोई युद्ध नहीं लड़ रहे हैं। यहां आप कानून के शासन के खिलाफ लड़ रहे हैं। खुद को व्यवस्थित करें। रक्षा मंत्रालय के कामकाज करने का यह कोई तरीका नहीं है।’’

सुनवाई की शुरुआत में, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने अदालत से कहा कि मंत्रालय को न्यायालय के आदेशानुसार कार्य करने के लिए समय दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हम आदेश का अनुपालन शुरू कर चुके हैं। इसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जा सकती है।’’

वेंकटरमण ने दलील दी कि 22 लाख पेंशनभोगियों में से आठ लाख को सरकार पैसे दे चुकी है और यह राशि 2,500 करोड़ रुपये है।

सैन्यकर्मियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने सवाल किया कि सरकार न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा को एकपक्षीय तरीके से कैसे बदल सकती है।

इसके बाद, पीठ ने सचिव को मुद्दे पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को यह भी चेतावनी दी कि यदि 15 मार्च तक बकाये का पूरा भुगतान नहीं किया जाता है तो नौ प्रतिशत ब्याज लगाया जाएगा।

शीर्ष न्यायालय ने विषय को होली की छुट्टी के बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

भाषा सुभाष नेत्रपाल

नेत्रपाल


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