एनजीटी सदस्यों के कार्यकाल संबंधी याचिका पर आठ सितंबर से पहले सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

एनजीटी सदस्यों के कार्यकाल संबंधी याचिका पर आठ सितंबर से पहले सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

एनजीटी सदस्यों के कार्यकाल संबंधी याचिका पर आठ सितंबर से पहले सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
Modified Date: August 31, 2026 / 01:08 pm IST
Published Date: August 31, 2026 1:08 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्यों के कार्यकाल से जुड़े मामले पर आठ सितंबर से पहले सुनवाई करने पर सोमवार को सहमति जताई।

एनजीटी बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायालय द्वारा दी गई अवधि समाप्त होने के बाद अधिकरण की तीन आंचलिक पीठ का कामकाज ठप हो सकता है जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई पहले करने पर सहमति जताई। इस मामले को पहले 15 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।

एनजीटी बार एसोसिएशन की ओर से पेश एक वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कुछ सदस्यों का कार्यकाल केवल आठ सितंबर तक बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि इसके बाद दक्षिणी आंचलिक पीठ और पश्चिमी आंचलिक पीठ समेत तीन क्षेत्रीय पीठों का कामकाज रुक सकता है।

वकील ने कहा कि एनजीटी अधिनियम एक सदस्यीय पीठ की अनुमति नहीं देता और ऐसे में अगर सदस्यों का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया या नयी नियुक्तियां नहीं की गईं तो संबंधित पीठें काम नहीं कर पाएंगी।

उन्होंने तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘दक्षिणी और पश्चिमी आंचलिक पीठ समेत एनजीटी की तीन पीठ को आठ सितंबर से कामकाज बंद करना पड़ेगा क्योंकि एनजीटी अधिनियम एक सदस्यीय पीठ की अनुमति नहीं देता। इससे इन पीठों का कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अब नया कानून लागू हो चुका है।

इस पर वकील ने कहा कि नये कानूनी प्रावधानों के तहत नियुक्तियां रातों-रात नहीं की जा सकतीं और इस बदलाव के दौरान कई पीठों में कामकाज के लिए जरूरी संख्या में सदस्य नहीं रह जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसा हुआ तो नयी नियुक्तियां होने तक केवल प्रधान न्यायपीठ की एक पीठ काम करेगी और इसमें तीन महीने या उससे भी अधिक समय लग सकता है। तीन आंचलिक पीठ का कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा और सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली में प्रधान न्यायपीठ को करनी पड़ेगी।’’

वकील ने यह भी बताया कि वर्तमान में दिल्ली स्थित एनजीटी की प्रधान न्यायपीठ के तहत दो पीठ काम कर रही हैं, लेकिन उनमें से एक आठ सितंबर के बाद काम नहीं कर पाएगी।

उन्होंने नये अधिनियम की धारा 24(3) के तहत संरक्षण संबंधी प्रावधान का भी उल्लेख किया और दलील दी कि नियुक्ति की जो प्रक्रियाएं पहले से चल रही हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इन नियुक्तियों की मौजूदा स्थिति को लेकर अनिश्चितता जताई।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘तो हम मामले को आठ सितंबर से पहले सूचीबद्ध कर सकते हैं।’’

भाषा

सिम्मी वैभव

वैभव


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