स्वामी विवेकानंद भारत की संस्कृति के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

स्वामी विवेकानंद भारत की संस्कृति के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

स्वामी विवेकानंद भारत की संस्कृति के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
Modified Date: January 12, 2026 / 07:24 pm IST
Published Date: January 12, 2026 7:24 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को आध्यात्मिक नेता स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह भारत की संस्कृति और दर्शन के महान अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विवेकानंद जयंती के अवसर पर ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए)’ और अधिवक्ता परिषद द्वारा संयुक्त रूप से यहां अदालत परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बात कही।

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प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उनके द्वारा बोला गया हर शब्द महत्वपूर्ण, दूरदर्शी, नैतिक और मूल्यों से परिपूर्ण था तथा उसने हमारे महान देश की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। वह भारत की संस्कृति और दर्शन के महान अंतरराष्ट्रीय राजदूत थे।’’

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान और दूरदर्शी नेता थे और उनकी शिक्षाएं देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘स्वामी विवेकानंद एक महान व्यक्तित्व थे। मेरा मानना ​​है कि उनकी शिक्षाएं हमेशा प्रासंगिक रहेंगी तथा नई पीढ़ी और इस देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।’’

विवेकानंद जयंती हर साल 12 जनवरी को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनायी जाती है। यह हिंदू संत स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है। भारत सरकार ने 1984 में इस दिन को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ घोषित किया था। अगले साल से यह दिवस भारत में हर साल मनाया जाने लगा।

उच्चतम न्यायालय के लॉन में आयोजित रक्तदान शिविर में शीर्ष अदालत के कई अन्य न्यायाधीश और वरिष्ठ वकील भी उपस्थित थे।

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


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