तमिलनाडु सरकार ने राजनीतिक, वैचारिक एवं सांपद्रायिक गतिविधियों की मेजबानी से निजी विद्यालयों को रोका
तमिलनाडु सरकार ने राजनीतिक, वैचारिक एवं सांपद्रायिक गतिविधियों की मेजबानी से निजी विद्यालयों को रोका
चेन्नई, पांच मार्च (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने निजी स्कूलों पर राजनीतिक, वैचारिक या सांप्रदायिक गतिविधियों के लिए अपना परिसर उपलब्ध कराने पर औपचारिक रूप से रोक लगाते हुए कहा है कि ऐसा करना विद्यालय परिसरों को तटस्थ शैक्षणिक क्षेत्र के रूप में बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
शिक्षा विभाग ने दो मार्च को एक सरकारी आदेश जारी कर तमिलनाडु निजी विद्यालय (विनियमन) नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शैक्षणिक अवसंरचना का उपयोग मुख्य रूप से और विशेष रूप से छात्र कल्याण एवं शैक्षणिक मार्गदर्शन के लिए किया जाए।
संशोधित नियमों के अनुसार विद्यालय भवन, उसके मैदान या हॉल समेत विद्यालय परिसर का उपयोग ऐसे किसी भी बाहरी व्यक्तियों या संगठनों के किसी भी कार्यक्रम, बैठक, अभियान या प्रशिक्षण के लिए नहीं किया जाएगा जो राजनीतिक, वैचारिक, सांप्रदायिक या विभाजनकारी हों।
इस प्रतिबंध में विशेष रूप से उन गतिविधियों को निशाना बनाया गया है जिनसे धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर दुर्भावना को बढ़ावा मिलने की आशंका है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रतिबंध स्कूल में कक्षा लगने के दौरान और उसके बाद भी लागू होता है, जिनमें सप्ताहांत, सार्वजनिक अवकाश और शीतकालीन या ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान के आयोजन शामिल हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि हालांकि रक्तदान शिविर, सामाजिक सेवा कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे गैर-सांप्रदायिक और गैर-राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
उसने कहा कि लेकिन इनके लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा और इन्हें विद्यालय के शैक्षणिक विभाग की सीधी देखरेख में आयोजित किया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, यह नीतिगत बदलाव हाल में कुड्डालोर के निजी स्कूल श्री सरस्वती विद्यालय से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल विवाद के बाद हुआ है।
दिसंबर 2025 में, स्कूल ने शीतकालीन अवकाश के दौरान सेवा भारती को अपने परिसर में शिविर आयोजित करने की अनुमति दी। जब स्कूल शिक्षा विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया, तो प्रबंधन ने मद्रास उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी और तर्क दिया कि मौजूदा नियम केवल कक्षा लगने के दौरान ऐसे अभ्यासों पर रोक लगाते हैं।
सरकार के हालिया संशोधन ने इस कानूनी खामी को दूर किया है।
भाषा
राजकुमार पवनेश
पवनेश

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