चेन्नई, 27 सितंबर (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने रविवार को उस विवादास्पद आदेश को वापस ले लिया, जिसमें राज्य के लोक (कानून-व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर रखा गया था।
यह फैसला राज्य में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के राजनीतिक सहयोगियों और पारदर्शिता के समर्थकों के कड़े विरोध के बाद लिया गया।
प्रशासन ने मानव संसाधन प्रबंधन (आर) विभाग के 21 सितंबर के सरकारी आदेश (जीओ) को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया। अब वापस लिए जा चुके इस आदेश में मूल रूप से पारदर्शिता कानून की धारा 24(4) का हवाला देते हुए विभाग को ‘‘खुफिया और सुरक्षा संगठन’’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिससे उसे सार्वजनिक खुलासों से छूट मिल गई थी।
आदेश को वापस लिए जाने का फैसला टीवीके नीत राज्य सरकार के शुरुआती कदम के बाद लिया गया है, जिसने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था और गठबंधन सहयोगियों कांग्रेस तथा विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी शुरुआती फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे ‘‘गलत परंपरा’’ स्थापित होगी। उन्होंने कहा था कि आरटीआई अधिनियम के दायरे को सीमित करने के बजाय इसका विस्तार किया जाना चाहिए।
भाषा देवेंद्र नेत्रपाल
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