तमिलनाडु: विजय मंत्रिमंडल का विस्तार; करीब 60 साल बाद सरकार में कांग्रेस की वापसी

तमिलनाडु: विजय मंत्रिमंडल का विस्तार; करीब 60 साल बाद सरकार में कांग्रेस की वापसी

तमिलनाडु: विजय मंत्रिमंडल का विस्तार; करीब 60 साल बाद सरकार में कांग्रेस की वापसी
Modified Date: May 21, 2026 / 03:00 pm IST
Published Date: May 21, 2026 3:00 pm IST

(तस्वीरों सहित)

चेन्नई, 21 मई (भाषा) मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बृहस्पतिवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए दो कांग्रेस विधायकों सहित 23 सदस्यों को और इसमें शामिल किया। इसके साथ ही तमिलनाडु में करीब 60 साल बाद कांग्रेस की सरकार में वापसी हुई है।

शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन में आयोजित किया गया जहां राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। टीवीके के विधायक श्रीनाथ, एस. कमाली, सी. विजयलक्ष्मी और आर.वी. रंजीत कुमार ने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ ली।

किल्लियूर से कांग्रेस के विधायक एस. राजेश कुमार और मेलूर से निर्वाचित पी. विश्वनाथन ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

तमिलनाडु के लिए कांग्रेस के प्रभारी गिरीश चोडणकर ने कहा कि पार्टी विधायकों का मंत्रिमंडल में शामिल होना राज्य के राजनीतिक इतिहास में “एक अहम घटनाक्रम” है।

उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ता पिछले 59 वर्षों से सत्ता में हिस्सेदारी के लिए संघर्ष कर रहे थे और पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ काम कर रहे थे। अब उन्हें इसका अवसर मिला है।”

करूर से कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने एक बयान में कहा, “59 साल बाद कांग्रेस पार्टी के दो सदस्यों ने तमिलनाडु मंत्रिमंडल में जगह बनाई है। यह कांग्रेस के लिए हर्ष का क्षण है। बड़े भाई विश्वनाथन और छोटे भाई राजेश कुमार को हार्दिक बधाई! उम्मीद है कि यह जिम्मेदारी तमिलनाडु की जनता की उत्कृष्ट सेवा का बड़ा अवसर बनेगी।”

कांग्रेस समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भी इसका स्वागत किया कि पार्टी विधायकों को 21 मई को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि भी है।

कुल 23 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली जिनमें तीन महिला विधायक भी शामिल हैं। विजय के करीबी मित्र और तूतिकोरिन विधानसभा सीट से निर्वाचित श्रीनाथ ने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ ली। मोहम्मद फरवास जे. और एन. मैरी विल्सन अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।

शपथ ग्रहण के दौरान राज्यपाल आर्लेकर ने कांग्रेस नेता राजेश कुमार को टोका और कहा कि वह केवल लिखित शपथ तक ही सीमित रहें। दरअसल, शपथ पढ़ते समय राजेश कुमार ने अचानक कांग्रेस नेताओं कामराज, राजीव गांधी और राहुल गांधी के नाम का उल्लेख किया, जिस पर राज्यपाल ने कहा, “यह आपकी शपथ का हिस्सा नहीं है।”

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही तमिलनाडु में करीब छह दशक बाद कांग्रेस की सरकार में वापसी हुई है क्योंकि द्रविड़ दलों द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने कभी अपने सहयोगी दलों को सत्ता में हिस्सेदारी नहीं दी। इनमें कांग्रेस भी शामिल है, जिसने अलग-अलग समय पर दोनों दलों के साथ गठबंधन किया था।

तमिलनाडु में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम थे, जिन्होंने 1963 से 1967 तक मुख्यमंत्री पद संभाला था। तब इस राज्य को मद्रास कहा जाता था।

स्वतंत्र भारत की पहली गैर-कांग्रेस सरकार 1967 में द्रविड़ नेता एवं द्रमुक संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई ने बनाई थी। उन्होंने तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी।

टीवीके के शीर्ष नेता एवं लोक निर्माण तथा खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने बुधवार को कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री विजय ऐसा चाहते हैं।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी के विधायकों का कैबिनेट में शामिल होना एक मजबूत गति का संकेत है। उन्होंने कहा कि इसी रफ्तार के साथ आगे बढ़ते हुए और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस व उसके सहयोगी दल 2029 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की सभी 39 सीट व पुडुचेरी की एकमात्र सीट पर जीत हासिल कर सकते हैं।

सरकार की स्थिरता पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में टैगोर ने कहा कि टीवीके सरकार पहले से ही स्थिर है।

उन्होंने कहा, ‘‘जनता द्वारा नकारे गए लोग चुनाव हार चुके हैं। वे अस्थिरता की बात करते रहेंगे- हमें उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।’’

श्रीरंगम विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित रमेश ने मंत्री पद की शपथ लेने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे पार्टी प्रमुख एवं मुख्यमंत्री विजय ने एक ‘‘शांत क्रांति’’ ला दी है। विजय ने यह धारणा बदल दी कि राजनीति में केवल प्रभावशाली पृष्ठभूमि वाले लोग ही आगे बढ़ सकते हैं। आज बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के युवा विधायक और मंत्री बन रहे हैं।’’

संविधान के अनुच्छेद 164 (1-ए) के अनुसार, किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

तमिलनाडु विधानसभा में 234 सदस्य हैं, इसलिए मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 35 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं।

विजय के नेतृत्व में 10 सदस्यीय कैबिनेट ने 10 मई 2026 को शपथ ली थी तथा 21 मई को 23 और विधायकों के शपथ लेने के बाद मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई है। अब केवल दो और मंत्री बनाए जा सकते हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वीसीके और आईयूएमएल में से एक-एक प्रतिनिधि को भविष्य में कैबिनेट में जगह मिल सकती है, जबकि अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों के कैबिनेट में शामिल होने की संभावना फिलहाल न के बराबर है।

एस.पी. वेलुमणि और सी.वे. षणमुगम के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन किया था और टीवीके सरकार ने 13 मई को आसानी से विश्वास मत जीत लिया था।

विधानसभा के 23 अप्रैल को हुए चुनाव में टीवीके ने 108 सीट जीती थीं और वामपंथी दलों, वीसीके तथा आईयूएमएल ने दो-दो सीट के साथ टीवीके को समर्थन दिया है। इसके अलावा पांच विधायकों वाली कांग्रेस पार्टी ने भी समर्थन दिया है।

भाषा खारी नरेश

नरेश


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