तमिलनाडु के मतदाताओं ने विजय को द्रविड़ पार्टियों के विश्वसनीय विकल्प के रूप में देखा: प्रदीप गुप्ता

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तमिलनाडु के मतदाताओं ने विजय को द्रविड़ पार्टियों के विश्वसनीय विकल्प के रूप में देखा: प्रदीप गुप्ता

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 04:22 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 04:22 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) चुनाव विश्लेषक प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि उनकी एजेंसी ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से लगभग एक साल पहले ही विजय के एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने के संकेत देने शुरू कर दिए थे। मतदाताओं द्वारा उन्हें राज्य की स्थापित द्रविड़ पार्टियों के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देखे जाने के कारण अभिनेता-राजनेता के समर्थन में लगातार वृद्धि हुई।

बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में गुप्ता ने कहा कि उनकी एजेंसी ‘एक्सिस माई इंडिया’ ने विजय के समर्थकों में हुई बढ़ोतरी का विश्लेषण किया तो पता चला कि दक्षिणी राज्य में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले उन्हें मिल रहे समर्थन का स्तर लगभग 25 प्रतिशत था जो बढ़कर मतदान के दिन तक 35 प्रतिशत हो गया।

गुप्ता ने कहा, ‘‘हमारी जमीनी तैयारी चुनाव से एक साल पहले शुरू हुई थी। चुनाव से लगभग छह महीने पहले उनका मत प्रतिशत लगभग 25 प्रतिशत रहने का अनुमान था, लेकिन चुनाव से तीन महीने पहले बढ़कर यह 28 प्रतिशत हो गया, फिर चुनाव से लगभग एक महीने पहले यह बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत हो गया। और मतदान के दिन यह 35 प्रतिशत तक पहुंच गया था। यही प्रगति का क्रम था।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का डर था कि विजय की टीवीके को सत्ता की दौड़ में शामिल करना ‘एक्सिस माई इंडिया’ की ‘बड़ी गलती’ हो सकती है, जबकि अधिकांश अन्य एजेंसियां द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत की भविष्यवाणी कर रही थीं। इस पर गुप्ता ने कहा कि चुनाव पूर्वानुमान में हमेशा अनिश्चितता का एक तत्व होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 98 से 120 सीट का अनुमान लगाया था क्योंकि इस बात पर संदेह था कि बहुमत का आंकड़ा (118) पार हो पाएगा या नहीं। यहां तक ​​कि मत प्रतिशत में दो प्रतिशत का अंतर भी सीटों के नतीजों को नाटकीय रूप से बदल सकता है।’’

गुप्ता ने बताया कि ‘एक्सिस माई इंडिया’ ने 35 प्रतिशत मत प्रतिशत का अनुमान लगाया था, जिसमें त्रुटि की गुंजाइश धनात्मक या ऋणात्मक रूप से दो प्रतिशत थी, और टीवीके को अंततः ठीक 35 प्रतिशत वोट मिले।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अनुमानित दायरे का मध्य बिंदु 109 सीट था, और अंततः उसने 108 सीट जीतीं। इस तरह हमने अपने पूर्वानुमान में जोखिम को कम किया।’’

गुप्ता ने समझाया कि गठबंधन बनने और उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के बाद, मतदाताओं ने विजय को अग्रणी उम्मीदवार के रूप में पहचानना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट होता जा रहा था कि वह सबसे आगे हैं। सवाल यह नहीं था कि वह उभर कर सामने आए हैं या नहीं, बल्कि यह था कि वह अंततः कितनी सीट जीतेंगे और क्या ये सीट सरकार बनाने के लिए पर्याप्त होंगी।’’

विजय के उदय की व्याख्या करते हुए गुप्ता ने कहा कि तमिल सिनेमा में अभिनेता की दशकों पुरानी लोकप्रियता ने उन्हें अद्वितीय ‘ब्रांड इक्विटी’ प्रदान की।

गुप्ता ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में विजय की फिल्मों में अक्सर सत्ता-विरोधी किरदार दिखाए गए हैं जिससे राजनीतिक यथास्थिति को चुनौती देने में सक्षम नेता के रूप में उनकी छवि और मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग उन्हें राजनीतिक मुद्दों से जुड़े नेतृत्वकर्ता की भूमिका में देखने लगे थे। एक बार जब यह दिशा तय हो गई, तो मतदाताओं ने पूछना शुरू कर दिया कि अगर मौजूदा सरकार नहीं, तो विकल्प कौन है?’’

गुप्ता ने तर्क दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक का कमजोर होना भी विजय के उदय के लिए राजनीतिक अवसर बन गया।

उन्होंने कहा, ‘‘लगभग 50 वर्षों तक द्रविड़ राजनीति या तो द्रमुक या अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन जनसांख्यिकीय परिवर्तनों ने एक युवा तमिलनाडु को जन्म दिया जो एक विश्वसनीय विकल्प की तलाश में है… लोग बदलाव चाहते थे और कुछ नया आजमाना चाहते थे। उन्होंने विजय को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जिस पर भरोसा किया जा सकता है और जो बदलाव लाने में सक्षम है।’’

भाषा संतोष मनीषा

मनीषा