शिक्षक भर्ती घोटाला:अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की, सिन्हा को जमानत दी
शिक्षक भर्ती घोटाला:अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की, सिन्हा को जमानत दी
कोलकाता, 28 फरवरी (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभियोजन की मंजूरी देने में लंबे समय तक देरी करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए स्कूल शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में विद्यालय सेवा आयोग के पूर्व सलाहकार एस पी सिन्हा को जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने शुक्रवार को सशर्त जमानत देते हुए सिन्हा को एक लाख रुपये के मुचलके के साथ इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने और विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष अपना पासपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत ने सरकारी सहायक शिक्षक का पद दिलाने का वादा करके विद्यालयों में नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर बड़ी रकम वसूले जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘ये आरोप शायद चिटफंड संचालकों द्वारा किए गए अपराधों से भी कहीं अधिक जघन्य हैं।’
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि अदालत ‘‘अभियोजन की स्वीकृति से जुड़े आंतरिक रूप से संबद्ध मुद्दे का उल्लेख किए बिना नहीं रह सकती।’’
अदालत ने कहा, ‘‘न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा यदि सभी आरोपियों को लंबी हिरासत के कारण धीरे-धीरे जमानत मिल जाए, लेकिन राज्य द्वारा मंजूरी नहीं मिलने के कारण मुकदमा/कार्यवाही रुक जाए।’
अदालत ने इस मुद्दे पर राज्य की दलीलों को ‘काफी टालमटोल भरा और लापरवाह’ बताया, खासकर पीड़ितों की कथित पीड़ा को देखते हुए और स्थिति को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया।
न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने कहा कि राज्य से यह उम्मीद की जाती है कि वह कानून के अनुसार और जल्द से जल्द अभियोजन की मंजूरी देने के प्रश्न पर निर्णय लेगा।
हजारों नौकरियां रद्द होने और लाखों अभ्यर्थियों को उचित अवसर से वंचित किए जाने का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि कथित अपराध ‘बहुत बड़े पैमाना’ का है।
उच्चतम न्यायालय ने अप्रैल 2025 में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण एसएससी द्वारा भर्ती किए गए 25,000 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।
चिटफंड मामलों से अंतर बताते हुए, अदालत ने कहा कि उन मामलों में, अपराध निजी व्यक्तियों द्वारा किए गए जिनका सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यहां आरोप यह है कि लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, ऐसे गंभीर अपराध किए गए, जिससे कई लोगों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी।’
सिन्हा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धनशोधन मामले में एक साल आठ महीने से हिरासत में हैं। अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि अनावश्यक स्थगन दिए बिना मामले की कार्यवाही में तेजी लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।
सिन्हा और पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को संबंधित सीबीआई मामले में उच्चतम न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी है।
जमानत याचिका का विरोध करते हुए, ईडी ने आरोप लगाया कि सिन्हा भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में सक्रिय रूप से शामिल थे और उन्होंने अपने, अपनी पत्नी और एक करीबी सहयोगी के नाम पर हासिल की गई संपत्तियों के माध्यम से अपराध की आय का धनशोधन किया।
सिन्हा के वकील ने कहा कि वे 74 वर्ष के हैं, सभी पदों से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और किसी भी प्रभावशाली पद पर नहीं हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि राज्य सरकार द्वारा मंजूरी देने में हुई देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
भाषा अमित संतोष
संतोष

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