तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने परिसीमन में दक्षिण के साथ ‘अन्याय’ का आरोप लगाया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने परिसीमन में दक्षिण के साथ 'अन्याय' का आरोप लगाया
हैदराबाद, 14 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को परिसीमन के मुद्दे को लेकर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यदि सीटों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ ‘‘अन्याय’’ होगा।
रेड्डी ने डॉ बी.आर. आंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने परिसीमन का मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कथित तौर पर दक्षिणी राज्यों की कीमत पर उत्तर प्रदेश या गुजरात में सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे इस बात से इनकार नहीं करते कि अगर उत्तरी राज्यों में आनुपातिक आधार पर सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है तो प्रतिनिधित्व के लिहाज से वहां की महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा की कुल सीट संख्या में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है, तो केरल में सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
उन्होंने कहा, “यदि किसी उत्तरी राज्य में 30 सीटें बढ़ती हैं, तो वहां दलितों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ सकता है। मैं इससे इनकार नहीं करता। लेकिन क्या दक्षिणी राज्यों में सीटें घटने से दलितों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं को नुकसान नहीं होगा?”
रेड्डी ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार दक्षिणी राज्यों में दलितों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं को नुकसान पहुंचाना चाहेगी, क्योंकि उन्होंने अतीत में राष्ट्रीय नीति के अनुसार जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है।
उन्होंने तेलंगाना और अन्य राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने के लिए संघर्ष करने का समर्थन किया।
रेड्डी ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण के लिए संसद में पेश किए जाने वाले विधेयक पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है और उनकी सरकार विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण संबंधी कानून पारित करने के लिए तैयार है।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था।
इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मंत्रिमंडल और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर इन समुदायों के नेताओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है।
बीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नेता विधानसभा सत्रों में भाग नहीं ले रहे हैं क्योंकि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन दलित नेता गद्दाम प्रसाद कुमार को सम्मानपूर्वक संबोधित करना होगा।
उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें इन वर्गों के व्यक्तियों की कुलपति के रूप में नियुक्ति शामिल है।
रेड्डी ने सोमवार को चेतावनी दी कि आनुपातिक आधार पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के साथ ‘अन्याय’ होगा और उन्होंने राजनीतिक दलों और अन्य लोगों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से आम सहमति बनाने की प्रक्रिया का आह्वान किया।
उन्होंने भाजपा पर दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रभाव को कम करने की ‘साजिश’ रचने का आरोप लगाया।
रेड्डी ने प्रधानमंत्री से परिसीमन के ‘हाइब्रिड’ मॉडल पर विचार करने का आग्रह किया, जिसमें 50 प्रतिशत सीटें आनुपातिक आधार पर और शेष 50 प्रतिशत सीटें सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के आधार पर बढ़ाई जाएं।
केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिला आरक्षण पर कभी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि डॉ. बी आर आंबेडकर जैसे दिग्गज भी इसके समर्थक थे।
भाषा
राखी संतोष
संतोष

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