तेलंगाना: के. कविता ने बीआरएस पर साधा निशाना, पार्टी के संविधान को बताया ‘मजाक’

तेलंगाना: के. कविता ने बीआरएस पर साधा निशाना, पार्टी के संविधान को बताया ‘मजाक’

तेलंगाना: के. कविता ने बीआरएस पर साधा निशाना, पार्टी के संविधान को बताया ‘मजाक’
Modified Date: January 5, 2026 / 07:25 pm IST
Published Date: January 5, 2026 7:25 pm IST

हैदराबाद, पांच जनवरी (भाषा) भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की विधान परिषद की निलंबित सदस्य के. कविता ने सोमवार को अपने पिता के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली पार्टी पर निशाना साधते हुए तेलंगाना में पिछली सरकार के दौरान भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और पार्टी के संविधान को ‘मजाक’ बताया।

कविता ने विधान परिषद में यह भी कहा कि बीआरएस शासनकाल के दौरान लिए गए कुछ अलोकप्रिय निर्णयों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

बीआरएस ने पलटवार करते हुए दावा किया कि कविता, केसीआर (उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री राव) को मानसिक पीड़ा पहुंचा रही हैं।

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पिछले साल सितंबर में बीआरएस से निलंबित होने के तुरंत बाद विधान परिषद से इस्तीफा देने वाली कविता ने परिषद अध्यक्ष गुथा सुखेन्द्र रेड्डी से इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया।

उन्होंने बीआरएस से अपने निलंबन से संबंधित घटनाक्रन को याद करते हुए कहा कि पार्टी की जिस अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति ने उन्हें निलंबित किया, वह रातोंरात अस्तित्व में आ गई और कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

कविता ने कहा, “उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति का हवाला दिया। राष्ट्रीय स्तर पर काम करने की चाह रखने वाली बीआरएस का संविधान मात्र आठ पन्नों का है। मैं आज साहसपूर्वक कह ​​रही हूं कि बीआरएस का संविधान एक मजाक है।”

उन्होंने निलंबन में किसी भी प्रक्रिया का पालन न किए जाने का दावा करते हुए कहा, “यह निश्चित रूप से पार्टी चलाने का तरीका नहीं है।”

कविता ने पिता केसीआर के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के दौरान कलेक्ट्रेट भवनों के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सिद्दिपेट और सिरसिल्ला स्थित भवन भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गए थे।

विधान परिषद की पूर्व सदस्य ने कहा, “वह सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार को उनके (केसीआर के) संज्ञान में लेकर आयी थीं। अमर ज्योति, आंबेडकर प्रतिमा, सचिवालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक हर जगह भ्रष्टाचार हुआ है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वे दो कलेक्ट्रेट हैं, जो निर्माण के बाद पहली बारिश में ही जलमग्न हो गए थे।”

अमर ज्योति (तेलंगाना के गठन के लिए प्राणों की आहुति देने वाले लोगों की स्मृति में बना स्मारक), आंबेडकर की विशाल प्रतिमा, नया सचिवालय परिसर और नए जिला कलेक्टर कार्यालय भवन बीआरएस शासनकाल के दौरान निर्मित किए गए थे।

कविता ने दावा किया कि उन्हें (दिल्ली शराब नीति से संबंधित एक मामले में) केसीआर के प्रति ‘प्रतिशोध’ के कारण गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने कहा कि बीआरएस ने कभी उनका समर्थन नहीं किया। कविता ने कई मुद्दों पर तीन साल तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से अकेले ही लड़ाई लड़ी।

कविता ने दावा किया कि तेलंगाना के गठन के बाद 2014 से ही बीआरएस में उन पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि जब 2024-2023 के दौरान पार्टी सत्ता में थी, तब टीआरएस का नाम बदलकर बीआरएस करने और राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने से वे सहमत नहीं थीं।

कविता ने दावा किया कि सिंचाई पर 1.89 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन केवल 14 लाख एकड़ (सिंचाई योग्य) नया क्षेत्र ही बनाया गया।

उन्होंने कहा कि 1.89 लाख करोड़ रुपये के इस खर्च से तेलंगाना के गठन (बीआरएस के सत्ता में आने) के बाद एक ठेकेदार बेहद अमीर हो गया।

कविता ने कहा, “बेघर गरीबों को घर नहीं मिले। लेकिन अकेले एक कंपनी को 1,02,666 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मिल गईं। यह देखने में निजी मामला लग सकता है। लेकिन तेलंगाना का गठन पारदर्शिता और जवाबदेही की नींव पर किया गया था।”

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पिछले साल तीन सितंबर को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन परिषद के सभापति ने इसे अब तक स्वीकार नहीं किया है।

केसीआर की बेटी ने कहा कि उन्होंने सभापति से सोमवार को उनके इस्तीफे के कारणों को समझाने के लिए समय मांगा है।

कविता द्वारा बीआरएस पर लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए पार्टी की पूर्व विधायक गोंगीदी सुनीता ने आरोप लगाया कि वह पिछले कई महीनों से केसीआर को मानसिक पीड़ा पहुंचा रही हैं।

उन्होंने कहा कि केसीआर ‘तेलंगाना के जनक’ हैं।

सुनीता ने कहा कि कविता के कार्यों और टिप्पणियों से बीआरएस को रोजाना असुविधा हो रही है।

उन्होंने कहा, “किसी के इशारे पर काम करना कविता के लिए ठीक नहीं है।”

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत


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