बेसमेंट में पानी भर जाने के कारण इमारत की मरम्मत की जा रही थी : सत्य निकेतन के निवासी
बेसमेंट में पानी भर जाने के कारण इमारत की मरम्मत की जा रही थी : सत्य निकेतन के निवासी
नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में ‘पीजी’ के तौर पर उपयोग में लाई जा रही पांच मंजिला इमारत के ढह जाने के बाद, रविवार को स्थानीय लोगों ने लगातार जलभराव की समस्या, बिना रोकटोक हो रहे निर्माण कार्य तथा इमारत के मालिकों और नगर निकाय एजेंसियों की ‘‘उदासीनता’’ की शिकायत की।
उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण जलभराव की स्थिति और खराब हो गई थी और इमारत के बेसमेंट में मरम्मत और निर्माण का काम चल रहा था। बचावकर्मी फंसे हुए छात्रों — जिनकी संख्या लगभग 30-40 बताई जा रही है — को बाहर निकालने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
हर साल, दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के ‘साउथ कैंपस’ के पास रहने के लिए सस्ती जगह की तलाश में राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से नये छात्र इस भीड़भाड़ वाली कॉलोनी में आते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना था कि अधिकतर मकान मालिक, जो इस इलाके में नहीं रहते, उन्हें इमारतों की हालत की कोई परवाह नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) भी इस पर ध्यान नहीं देती।
एक स्थानीय निवासी ने बताया, ‘‘नये शैक्षणिक सत्र में ही इमारत की रंगाई करते हैं, तो हमें कैसे पता चलेगा कि कोई इमारत जर्जर है? एमसीडी कोई निरीक्षण नहीं करती।’’
निवासियों ने दावा किया कि ढही हुई इमारत के बगल में ही एमसीडी का कार्यालय स्थित है। उन्होंने कहा कि ढही हुई इमारत के पीछे वाली गली में बन रही एक इमारत, जिसे लड़कियों के ‘पीजी’ के रूप में इस्तेमाल किया जाना था, लगभग दो साल पहले ढह गई थी और तब से उसी हालत में है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि ढलान वाली ज़मीन की वजह से यहां लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी रहती है और पानी अक्सर काफी समय तक जमा रहता है।
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे राम, जो पास की ही एक लॉन्ड्री की दुकान पर अपने कपड़े लेने आए थे, ने बताया कि छात्र अभी भी अपने दोस्तों को फोन कर मदद मांग रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें बताया गया है कि अब भी करीब 30 लोग फंसे हुए होंगे। मैंने जोरदार गड़गड़ाहट की आवाज सुनी और तुरंत उस जगह की ओर भागा। थोड़ी ही देर में पुलिस अधिकारी भी वहां पहुंच गए।’’
स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत के बेसमेंट में पानी भर गया था, जहां बारिश के बावजूद मजदूर काम कर रहे थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पांच मंजिला इमारत में एक बेसमेंट भी था। पहली और दूसरी मंजिल के कमरों में लड़के रहते थे और तीसरी मंजिल पर लड़कियां रहती थीं। उन्होंने बताया कि भूतल पर मेस थी, जबकि बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था।
राम ने आरोप लगाया कि मलबे को ठीक से हटाया नहीं जा रहा।
वहां रहने वाले लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम ने इलाके की इमारतों का नियमित निरीक्षण नहीं किया।
इन आरोपों की तत्काल स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
प्रियंका, जो पिछले 20-22 साल से इस इलाके में रह रही हैं, ने आरोप लगाया कि सत्य निकेतन में कई इमारतों को पीजी में बदल दिया गया है और कई मकान मालिक कहीं और रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां पांच-छह मंजिल तक की इमारतें बन रही हैं। कई घरों को लड़कों के पीजी में बदल दिया गया है और मकान मालिक कहीं और चले गए हैं। वे इमारत को पीजी नाम दे देते हैं, ऑनलाइन किराया लेते हैं और बिना दोबारा देखे-परखे इलाके से चले जाते हैं।’’
पुलिस ने बताया कि इमारत 50 साल पुरानी थी।
प्रियंका ने कहा, ‘‘पूरा सत्य निकेतन पीजी से भरा हुआ है। यहां मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक ही रहते हैं।’’
प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां तक कि नालियां और सीवर भी खुले हुए हैं। इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे। बारिश हो रही थी, इसलिए अधिकतर छात्र अपने कमरों में थे, जबकि कुछ छात्र सप्ताहांत होने के कारण घर गए हुए थे।’’
पुलिस के अनुसार, अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बचाए गए नौ लोगों में से पांच की हालत गंभीर है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इमारत के मालिक हरि राम बंसल हैं, जो अब गुरुग्राम में रहते हैं और लगभग 20 साल पहले सत्य निकेतन से वहां चले गए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘बेसमेंट में कुछ काम चल रहा था और एक दीवार हटाई जा रही थी। बंसल अक्सर यहां आते-जाते रहते थे।’’
एक और स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि इमारत में लगभग 15 कमरे थे और हर कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘छात्रावास हमेशा भरा रहता था। मलबे के नीचे अभी भी कई लोग फंसे हो सकते हैं। गलियां बहुत संकरी हैं, इसलिए बचाव कार्य में लगी गाड़ियों का मौके पर जल्दी पहुंचना मुश्किल था।’’
प्रत्यक्षदर्शी सनी देढ़ा ने बताया कि उनका दोस्त शांतनु, जो मोतीलाल नेहरू कॉलेज में संध्या कक्षा का छात्र है, पीजी में सो रहा था, तभी इमारत ढह गई।
देढ़ा ने कहा, ‘‘वह गंभीर रूप से घायल है और उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। मुझे लगभग आधे घंटे पहले अपने दोस्त का फोन आया और मैं तुरंत यहां पहुंचा।’’
उन्होंने बताया कि शांतनु राजस्थान के चुरू का रहने वाला है।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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