देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी

देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी

देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी
Modified Date: July 18, 2026 / 12:24 pm IST
Published Date: July 18, 2026 12:24 pm IST

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 18 जुलाई (भाषा) देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ का शनिवार को यहां अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया।

यह रॉकेट कई छोटे उपग्रहों या उपकरणों को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा, जिन्हें नयी अंतरिक्ष तकनीकों के परीक्षण और प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया है और साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक विशेष पोस्टकार्ट भी लेकर जा रहा है।

‘मिशन आगमन’ नामक इस परीक्षण उड़ान का प्रक्षेपण देश के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस मिशन का संचालन हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने किया।

बादलों से घिरे मौसम के बीच सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा, चार चरणों वाला ‘विक्रम-1’ रॉकेट शनिवार दोपहर 12:05 बजे यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले प्रक्षेपण परिसर से रवाना हुआ।

इससे पहले नेविगेशन प्रणाली से जुड़ी संभावित समस्या के कारण प्रक्षेपण को ‘‘अस्थायी रूप से रोक’’ (प्लान्ड होल्ड) दिया गया था, जिसके कारण प्रक्षेपण निर्धारित समय पूर्वाह्न 11:30 बजे के बजाय 35 मिनट की देरी से किया गया।

करीब 16 मिनट से कुछ कम समय की प्रारंभिक उड़ान के बाद ‘विक्रम-1’ से घरेलू और विदेशी पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर 60 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किए जाने की उम्मीद है।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखे गए ‘विक्रम-1’ का निर्माण पूर्णतः कार्बन कंपोजिट संरचना से किया गया है। इसमें कंपनी द्वारा विकसित प्रणोदन प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है, जिनमें थ्री-डी प्रिंटेड इंजन और उच्च-प्रणोद (हाई-थ्रस्ट) ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर शामिल हैं।

रॉकेट में ग्रहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के ‘स्कोप’ के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों के अलावा ‘कॉस्मिक ब्लूम’ शीर्षक वाली एक कलाकृति भी भेजी जा रही है।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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