अदालत ने स्वैन की याचिका पर केंद्र को जवाब देने के लिये और दो हफ्ते दिये
अदालत ने स्वैन की याचिका पर केंद्र को जवाब देने के लिये और दो हफ्ते दिये
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार को शिक्षाविद अशोक स्वैन की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो और हफ्ते का समय दिया है।
इस याचिका में स्वैन ने उन्हें कथित काली सूची में डालने के आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत भारत में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया है।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव से अतिरिक्त समय प्रदान करने का अनुरोध किया।
अदालत ने कहा, “प्रतिवादी के अधिवक्ता के अनुरोध पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का और समय दिया जाता है।’’ इसके साथ ही उन्होंने मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की।
अदालत ने नवंबर 2025 में स्वैन की याचिका पर नोटिस जारी किया था और गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, स्वीडन और लातविया में भारतीय दूतावास तथा आव्रजन ब्यूरो को तीन सप्ताह के भीतर अपने जवाब दाखिल करने को कहा था।
स्वीडन और लातविया में भारतीय दूतावास ने 8 फरवरी 2024 को ओसीआई कार्ड को नागरिकता अधिनियम के तहत रद्द कर दिया था।
स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय के शांति एवं संघर्ष अध्ययन विभाग में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष स्वैन ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें विदेशी अधिनियम के तहत कथित कालीसूची आदेश के आधार पर भारत में प्रवेश से रोका गया है। यह जानकारी उन्हें इस मुद्दे पर उनकी पिछली याचिका में केंद्र द्वारा दायर जवाबी हलफनामे से मिली।
उन्होंने कहा कि उनकी बुजुर्ग मां भारत में रहती हैं, और अस्वस्थ हैं, लेकिन वह पिछले कई वर्षों से उनसे मिलने नहीं आ सके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की कार्रवाई एक काली सूची में डालने के आदेश के तहत की गई है, जिसकी सामग्री और कानूनी आधार न तो उन्हें बताए गए हैं और न ही इसे नागरिकता अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त संवैधानिक संरक्षण के मानकों पर परखा गया है।
स्वैन ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अधिकारियों को उनके ओसीआई कार्ड के आधार पर भारत में प्रवेश की अनुमति देने का निर्देश दे, कथित आदेश से संबंधित अभिलेख तलब करे और उस आदेश या उनके प्रवेश पर रोक लगाने वाले किसी अन्य आदेश को रद्द करे।
भाषा रंजन नरेश पवनेश
पवनेश

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