उच्च न्यायालय ने कारोबारी संजय कपूर की वसीयत पर आदेश संशोधित करने की अर्जी स्वीकार कर ली
उच्च न्यायालय ने कारोबारी संजय कपूर की वसीयत पर आदेश संशोधित करने की अर्जी स्वीकार कर ली
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रिया कपूर द्वारा दायर वह अर्जी शुक्रवार को स्वीकार कर ली, जिसमें उनके दिवंगत पति संजय कपूर की कथित वसीयत से संबंधित कार्यवाही से ननद का नाम अदालत के आदेश से हटाने का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने संजय की पूर्व पत्नी एवं अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दो बच्चों द्वारा दायर उस याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उनकी (संजय की) कथित वसीयत को चुनौती दी गई थी और कथित तौर पर 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की गई थी।
उन्होंने प्रिया और उनके नाबालिग बेटे की ओर से दायर अर्जी स्वीकार कर ली, जिसमें 10 सितंबर के आदेश से मंदिरा कपूर (संजय कपूर की बहन) का नाम हटाने का अनुरोध किया गया था।
प्रिया का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि कार्यवाही में उनका (मंदिरा का) नाम शामिल करना ‘‘मंदिरा द्वारा मामले में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने का प्रयास’’ था।
अर्जी में दावा किया गया कि उक्त आदेश ‘‘मंदिरा की ओर से वकील की उपस्थिति को गलत तरीके से दर्शाता है, जबकि वह वर्तमान कार्यवाही में पक्षकार नहीं हैं।’’
अदालत ने 10 सितंबर को प्रिया को निर्देश दिया था कि वह 12 जून तक की उनकी (संजय की) सभी चल और अचल संपत्तियों का खुलासा करें।
करिश्मा और संजय ने 2003 में शादी की थी, लेकिन 2016 में उनका तलाक हो गया।
संजय की 12 जून को लंदन में एक पोलो मैच के दौरान मृत्यु हो गई, जब कथित तौर पर एक मधुमक्खी निगल लेने के बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।
खबरों के अनुसार, उनकी मां रानी कपूर ने हाल में ब्रिटेन के अधिकारियों को पत्र लिखकर अपने बेटे की मृत्यु की जांच की मांग की तथा स्वाभाविक कारणों से मृत्यु होने की संभावना को खारिज किया और संभवत: हत्या किये जाने, साजिश और वित्तीय धोखाधड़ी का दावा किया।
भाषा सुभाष माधव
माधव


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