मां की मुहब्बत ऐसी की बेटे की प्रतिमा को भी न लगे ठंड, इसलिए कंबल ओढ़ा दिया

मां की मुहब्बत ऐसी की बेटे की प्रतिमा को भी न लगे ठंड, इसलिए कंबल ओढ़ा दिया

मां की मुहब्बत ऐसी की बेटे की प्रतिमा को भी न लगे ठंड, इसलिए कंबल ओढ़ा दिया
Modified Date: January 11, 2026 / 07:53 pm IST
Published Date: January 11, 2026 7:53 pm IST

जम्मू, 11 जनवरी (भाषा) देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सीमा सुरक्षा बल के जवान गुरनाम सिंह की प्रतिमा मां की निश्चछल प्रेम का प्रतीक बन गई है। बेटे को खो चुकी मां ने बेटे की प्रतिमा को भी ठंड लगता नहीं देख सकी और उसे कंबल ओढ़ा दिया।

गुरनाम सिंह ने 2016 में 26 वर्ष की आयु में आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी थी।

जम्मू के आर एस पुरा सेक्टर में स्थित शहीद गुरनाम चौक पर कांच के फ्रेम में स्थापित यह प्रतिमा, उनके गृहनगर में साहस और बलिदान का प्रतीक है। लेकिन गुरनाम सिंह की मां जसवंत कौर के लिए, यह सिर्फ एक स्मारक नहीं बल्कि उनका बेटा है – जिसकी याद वह हर दिन संजोकर रखती हैं और जिसकी तस्वीर वह अपनी गोद में लिए रहती हैं।

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स्थानीय लोगों ने बताया कि कौर लगभग रोजाना स्मारक पर आती हैं और प्रतिमा की सफाई करती हैं। हर बार वह कांच को पोंछती हैं, प्रतिमा के आधार को साफ करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि स्मारक साफ-सुथरा और धूल रहित रहे।

उन्होंने बताया कि कौर ने कुछ समय पहले मूर्ति पर एक कंबल ओढ़ा दिया, मानो वह अपने बेटे को ठंड से बचा रही हो। इस घटना ने राहगीरों का ध्यान आकर्षित किया और कई लोग इसे देख भावुक नजर आए।

स्थानीय निवासी शेर सिंह ने कहा, ‘‘कोई भाषण या समारोह नहीं हुआ – केवल एक मां का सहज भाव था जो प्रेम, हानि और स्मरण को व्यक्त करता था।’’

सोशल मीडिया पर कंबल से ढकी प्रतिमा की तस्वीरें साझा की गईं, जिसपर लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोगों का मानना है ​​​कि जहां राष्ट्र आधिकारिक श्रद्धांजलि के माध्यम से अपने शहीद सैनिकों को सम्मानित करता है, वहीं यह श्रद्धा शहीदों के परिवारों द्वारा किए गए अदृश्य बलिदानों को भी उजागर करती है।

गुरनाम सिंह के पिता कुलबीर सिंह ने कहा कि एक मां की अपने बच्चे के लिए चिंता कभी कम नहीं होती, चाहे वह जीवित हो या न हो।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘एक मां हमेशा मां ही रहती है। कभी वह चुपचाप रोती है और कभी वह खाना-पीना छोड़ देती है।’’

कुलबीर सिंह ने कहा कि जब सर्दी का मौसम शुरू होता है, तो कौर उसकी मूर्ति को चार महीने के लिए एक गर्म कंबल से ढक देती हैं, और फिर उसे एक हल्के कंबल से बदल देती हैं।

उन्होंने कहा कि परिवार को अपने बेटे पर गर्व है, जिसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

कांस्टेबल गुरनाम सिंह को राष्ट्रपति के पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में भारी हथियारों से लैस छह आतंकवादियों के एक समूह द्वारा घुसपैठ के प्रयास को विफल कर दिया था और उसके दो दिन बाद एक बार फिर घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी थी।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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