केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है उच्च रक्तचाप की समस्या, विशेषज्ञों ने दी समय रहते जांच कराने की सलाह
केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है उच्च रक्तचाप की समस्या, विशेषज्ञों ने दी समय रहते जांच कराने की सलाह
नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) भारत में अब कम उम्र के युवाओं में भी उच्च रक्तचाप की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो पहले ज्यादातर मध्यम और अधिक उम्र के लोगों की बीमारी मानी जाती थी। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी कुछ वजह ज्यादा समय बैठे रहने की आदत, मोटापा, लगातार तनाव व अपौष्टिक भोजन हैं।
चिकित्सकों ने कहा कि कई लोगों को तब तक यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या है, जब तक हृदयाघात, दौरे पड़ने या गुर्दे की बीमारी जैसी गंभीर समस्या नहीं हो जाती।
एनएफएचएस-6 (2023-24) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 15 साल से अधिक उम्र की 19.4 प्रतिशत युवतियों और 22.1 प्रतिशत युवकों को उच्च रक्तचाप की समस्या है या वे इसके लिए दवा ले रहे हैं। शहरों में ऐसे लोगों की संख्या गांवों की तुलना में ज्यादा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि उच्च रक्तचाप में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते और इसकी जानकारी तब मिलती है, जब बीमारी बढ़ चुकी होती है।
‘इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट लंग्स डिजीज रिसर्च सेंटर’ के चेयरमैन और ‘आईलिव कनेक्ट’ के संस्थापक डॉ. राहुल चंदोला ने कहा, ‘‘ज्यादातर युवा मरीज खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करते हैं। उन्हें अक्सर सामान्य जांच, ऑपरेशन से पहले की जांच या हृदय से जुड़ी किसी आपात स्थिति के बाद पता चलता है कि उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या है।’’
उन्होंने कहा कि अस्पताल में कराई गई रक्तचाप की जांच केवल उस समय की स्थिति बताती है जबकि जरूरी बात यह जानना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में कई हफ्तों और महीनों तक रक्तचाप कैसा रहता है।
डॉ. चंदोला ने कहा, ‘‘रक्तचाप की जानकारी सीधे चिकित्सकों को भेजने के लिए घर पर इस्तेमाल होने वाले डिजिटल उपकरण की मदद से उच्च रक्तचाप की समस्या का समय पर पता लगाया जा सकता है, इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है और गंभीर समस्याओं को होने से पहले रोका जा सकता है।’’
उन्होंने कहा कि सभी वयस्कों, खासकर मोटापा, मधुमेह के शिकार व्यक्तियों और ऐसे लोगों को घर पर सही डिजिटल मशीन से नियमित रूप से रक्तचाप जांचना चाहिए, जिनके परिवार में दूसरे लोग उच्च रक्तचाप या हृदय रोग से पीड़ित हैं।
आईसीएमआर-इंडियाब के अध्ययन में पता चला है कि भारत में चार में से एक से ज्यादा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को इसका पता भी नहीं है। अध्ययन में मोटापा, मधुमेह, शहरों का रहन-सहन, शारीरिक गतिविधि की कमी और ज्यादा नमक खाना इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।
एम्स, दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग ने कहा कि 10 साल पहले 40 साल से कम उम्र के लोगों में उच्च रक्तचाप के मामले बहुत कम देखने को मिलते थे।
उन्होंने कहा, ‘आज यह लगभग हर दिन देखने को मिल रहा है।’
डॉ. नारंग ने कहा कि कई युवा लंबे समय तक बैठे रहते हैं, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, अच्छी नींद नहीं लेते और लगातार तनाव में रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ये सभी चीजें मिलकर कम उम्र में ही रक्त वाहिकाओं को तेजी से कमजोर कर रही हैं।’’
नारंग ने कहा, ‘‘लोग अक्सर मानते हैं कि उच्च रक्तचाप सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी है। यह सोच बदलनी होगी। जिस तरह लोग वजन और रक्त शर्करा की जांच कराते हैं, उसी तरह रक्तचाप की भी नियमित जांच होनी चाहिए। समय पर पता चलने और जीवनशैली में बदलाव से दिल की बीमारियों से कई वर्षों तक बचा जा सकता है।’’
डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि बिना इलाज के उच्च रक्तचाप चुपचाप दिल, दिमाग और गुर्दे तक खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, इससे कम उम्र में ही हृदय रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है।
चिकित्सकों ने कहा कि खासकर युवाओं में उच्च रक्तचाप से बचाव का सबसे अच्छा तरीका जीवनशैली में बदलाव है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल और एबीवीआईएमएस के कार्डियोथोरेसिक व वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया ने कहा कि हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट व्यायाम करना, शरीर का वजन नियंत्रित रखना, खाने में नमक कम करना, फल और सब्जियां ज्यादा खाना, तंबाकू से दूर रहना, शराब कम पीना, तनाव में कमी और पर्याप्त नींद लेना रक्तचाप कम करने और भविष्य में हृदय रोगों का खतरा घटाने में मदद करता है।
उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादा नमक खाना भी उच्च रक्तचाप का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।
डॉ. झाझरिया ने कहा कि आईसीएमआर की एक पहल के दौरान पता चला कि शहर और गांव, दोनों जगह लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय की गई प्रतिदिन पांच ग्राम की सीमा से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। इसलिए शोधकर्ता कम सोडियम वाले नमक के इस्तेमाल पर भी अध्ययन कर रहे हैं, ताकि उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में हृदय रोग अब भी मौत का सबसे बड़ा कारण हैं, ऐसे में अगर उच्च रक्तचाप का समय रहते पता चल जाए और उसे नियंत्रित कर लिया जाए, तो हर साल हजारों हृदयाघात, दौरों और लंबे समय तक रहने वाली गुर्दों की बीमारी के मामलों को रोका जा सकता है।
भाषा जोहेब शफीक
शफीक

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