विशेष सीबीआई अदालत ने आरोप पत्र दायर किए जाने के 27 साल बाद बैंक प्रबंधक को सजा सुनाई

विशेष सीबीआई अदालत ने आरोप पत्र दायर किए जाने के 27 साल बाद बैंक प्रबंधक को सजा सुनाई

विशेष सीबीआई अदालत ने आरोप पत्र दायर किए जाने के 27 साल बाद बैंक प्रबंधक को सजा सुनाई
Modified Date: February 26, 2024 / 09:00 pm IST
Published Date: February 26, 2024 9:00 pm IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) मुंबई में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने बैंक ऑफ बड़ौदा को 15 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने के दो अलग-अलग मामलों में आरोप पत्र दायर होने के 27 साल बाद बैंक प्रबंधक को दोषी करार दिया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपी साजिशकर्ताओं को धोखाधड़ी से बैंक का पैसा हस्तांतरित करके 10.50 करोड़ और पांच करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए 1996 में मुंबई की वॉकेश्वर रोड शाखा में तैनात तत्कालीन मुख्य प्रबंधक रामचंद्र श्रीधर जोशी के खिलाफ दो मामलों में आरोप पत्र दायर किया था। एजेंसी ने एक बयान में यह जानकारी दी।

बयान में कहा गया है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने 1994 में जांच अपने हाथ में ली थी और 1996 में दोनों मामलों में आरोप पत्र दायर किया था।

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सुनवाई पूरी होने के बाद, विशेष सीबीआई अदालत ने जोशी को पहले मामले में दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया जबकि दूसरे मामले में एक साल के कारावास की सजा सुनाई और 1.37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, “दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा सुनवाई के दौरान उनकी मृत्यु के कारण खत्म कर दिया गया, जबकि एक अन्य आरोपी को आरोपमुक्त कर दिया गया।”

भाषा जोहेब माधव

माधव


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