संसद में एक ही सत्र में विधेयक पेश करने और उन्हें पारित करने का चलन बढ़ रहा है्: पीआरएस

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संसद में एक ही सत्र में विधेयक पेश करने और उन्हें पारित करने का चलन बढ़ रहा है्: पीआरएस

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 07:16 PM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 07:16 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) अठारहवीं लोकसभा में अब तक पेश किए गए आधे से अधिक विधेयक उसी सत्र में दोनों सदनों से पारित हो गए हैं, जिसमें उन्हें पेश किया गया। पिछले एक साल में इस मोर्चे पर तीव्र वृद्धि का रवैया नजर आया है।

‘पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’ के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आयी है।

पीआरएस के सत्रवार डेटा के विश्लेषण के अनुसार, इस लोकसभा के गठन के बाद से पेश किए गए 64 विधेयकों में से 34 (यानी 53 प्रतिशत) विधेयक उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हो गए, जिसमें उन्हें पेश किया गया था।

पीआरएस के डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि 16वीं लोकसभा के दौरान यह अनुपात 33 प्रतिशत था, जब पेश किए गए 189 विधेयकों में से 63 उसी सत्र में पारित हो गए थे। 17वीं लोकसभा के दौरान यह अनुपात लगभग दोगुना होकर 62 प्रतिशत हो गया, जब पेश किए गए 190 विधेयकों में 117 उसी सत्र में पारित हो गए।

हालांकि, पीआरएस के रिकॉर्ड के अनुसार, 18वीं लोकसभा की शुरुआत इस मामले में धीमी रही। पीआरएस एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संगठन है जो संसद और राज्य विधानसभाओं के कामकाज पर रिसर्च करता है और उन पर नज़र रखता है।

वर्ष 2026 के बजट सत्र में, पेश किए गए 10 विधेयकों में से पांच उसी सत्र में दोनों सदनों से पारित हो गए।

यह प्रवृति मॉनसून सत्र में सबसे ज़्यादा देखी गयी, जो 13 अगस्त को खत्म हुआ। सत्र खत्म होने से पहले पारित किए गए 12 विधेयकों में 11 पारित हो गए।

सिर्फ़ भारतीय सांख्यिकी संस्थान, 2026 ही लंबित रह गया।

सरकार के शुरुआती विधायी एजेंडा में पेश करने और पास करने के लिए पांच नए विधेयक विचारार्थ और पारित किए जाने के लिए सूचीबद्ध थे तथा दो लंबित विधेयक थे। लेकिन संसद से पारित हुए 11 विधेयकों में से छह ऐसे थे जिन्हें शुरुआती एजेंडा में पेश करने के लिए शामिल नहीं किया गया था।

सरकार के एजेंडा में विचार करने और पारित किए जाने के लिए शामिल दो लंबित विधेयकों में से किसी को भी पारित नहीं कराया जा सका। ये दो विधेयक हैं-विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 और विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026।

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष