विधायकों के मंत्री पद की आकांक्षा रखने में कुछ भी गलत नहीं: कर्नाटक के गृह मंत्री परमेश्वर

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विधायकों के मंत्री पद की आकांक्षा रखने में कुछ भी गलत नहीं: कर्नाटक के गृह मंत्री परमेश्वर

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 02:51 PM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 02:51 PM IST

बेंगलुरु, 13 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों का एक समूह मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग को लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए है ताकि उन्हें इसमें शामिल किया जा सके। इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने सोमवार को कहा कि विधायक मंत्री पद की आकांक्षा रखते हैं तो इसमें कोई गलत बात नहीं है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुभवी विधायक ऐसी जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम हैं। उनकी यह टिप्पणी वरिष्ठ और नवनिर्वाचित विधायकों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष मंत्रिमंडल में फेरबदल और अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान किये जाने की मांग को लेकर की गई लामबंदी के एक दिन बाद आई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता परमेश्वर ने कहा, ‘‘उनका (मंत्री पद) मांगना कोई गलत बात नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि विधायक, जिनमें से कुछ तीन बार निर्वाचित हो चुके हैं, मंत्री पद संभालने में सक्षम हैं।

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में किसी भी तरह के फेरबदल के बारे में अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लेता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मुख्यमंत्री (सिद्धरमैया), शीर्ष नेतृत्व और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (डीके शिवकुमार) फेरबदल के बारे में निर्णय लेते हैं। ये तीनों एक साथ बैठकर निर्णय लेते हैं।’’

मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि मंत्रिमंडल गठन की स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘पहले भी जब मैं (प्रदेश कांग्रेस) अध्यक्ष था, मंत्रिमंडल गठन के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष, कांग्रेस के विधायक दल के नेता (सीएलपी) और हमारे प्रभारी महासचिव निर्णय लेते थे, जिन्हें फिर कांग्रेस अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था, उनकी स्वीकृति प्राप्त की जाती थी और उसके बाद घोषणा की जाती थी।’’

उन्होंने कहा कि आज भी उसी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा नए मंत्रियों के लिए जगह बनाने के प्रश्न पर परमेश्वर ने कहा कि वे पार्टी के निर्णय का पालन करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि शीर्ष नेतृत्व निर्णय लेता है तो हमें इसे स्वीकार करना होगा। इसे अस्वीकार करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।’’

पार्टी अनुशासन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘चाहे मैं हूं, परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी हों या ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज, हम सभी वरिष्ठ हैं। यदि वे (शीर्ष नेतृत्व) निर्णय लेते हैं कि हमें बदला जाना चाहिए और परिवर्तन किया जाना चाहिए, तो हमारे विरोध करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।’’

उन्होंने स्पष्ट किया कि चर्चाएं केवल मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल तक सीमित थीं और नेतृत्व संबंधी निर्णय पूरी तरह से आला कमान के हाथ में हैं।

उन्होंने कहा कि चर्चाएं केवल मंत्रिमंडल में फेरबदल तक ही सीमित थीं, ना कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को बदलने के बारे में थी। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार पिछले छह सालों से इस पद पर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अभी हम मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा कर रहे हैं, पार्टी (प्रदेश) अध्यक्ष के बारे में नहीं। ऐसे सभी मामले शीर्ष नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र में हैं।’’

परमेश्वर ने पूर्व में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में खुद की नियुक्ति को याद करते हुए कहा कि उन्होंने इस पद के लिए लामबंदी नहीं की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मुझे प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, तो मैंने इसके लिए लामबंदी नहीं की। हमारी नेता सोनिया गांधी ने यह निर्णय लिया। यह मेरे लिए आश्चर्य की बात थी। मैंने इसके लिए अनुरोध नहीं किया था।’’

कई वरिष्ठ विधायक रविवार को मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए दबाव बनाने के वास्ते दिल्ली पहुंचे, जबकि पहली बार चुने गए विधायकों ने सिद्धरमैया के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में कम से कम पांच सीट की मांग की।

भाषा

संतोष मनीषा

मनीषा