विनियोग और वित्त विधेयकों पर अधिक चर्चा होनी चाहिए : आप सांसद

विनियोग और वित्त विधेयकों पर अधिक चर्चा होनी चाहिए : आप सांसद

विनियोग और वित्त विधेयकों पर अधिक चर्चा होनी चाहिए : आप सांसद
Modified Date: March 27, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: March 27, 2026 5:34 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य अशोक कुमार मित्तल ने जोर दिया कि विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

मित्तल ने कहा कि दोनों काफी अहम विधेयक हैं लेकिन दोनों पर कुल मिला कर सदन में 11 घंटे ही चर्चा की गई जबकि मंत्रालय के कामकाज पर अधिक चर्चा की गई। आप सदस्य उच्च सदन में वित्त विधेयक पर हुई चर्चा में भाग ले रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकार और भाजपा द्वारा 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने और उस समय ‘दावत’ खिलाने का सपना दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘पेट आज खाली है तो आज भरा जाना चाहिए, 2047 में नहीं।’’

आप सदस्य ने 12 लाख रुपये तक आयकर में छूट का उल्लेख करते हुए कहा कि उससे अधिक आय पर भारी कर लगता है। उन्होंने अपने एक कर्मचारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी आय में 50 हजार रुपये की वृद्धि हुयी और उससे ज्यादा उसे आयकर देय हो गया।

उन्होंने कहा कि वेतन का बढ़ना ही ‘पेनाल्टी’ बन गया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके लिए वेतनभोगी वर्ग दुधारू गाय हो गयी है।

उन्होंने जीएसटी ढांचे में सुधार की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसमें छोटी-छोटी गलतियों पर व्यापारियों को गिरफ्तार कर लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रावधान से जीएसटी भ्रष्टाचार की दुकान बन गया है।

मित्तल ने ‘‘मार्च क्लीरेंस’’ का जिक्र करते हुए कहा कि 11 महीने काम नहीं किया जाता और मार्च आते ही पूरा बचा पैसा एक महीने में खपाया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को देखना चाहिए कि करदाताओं के पैसों का दुरूपयोग नहीं हो।

वाईएसआरसीपी सदस्य एस निरंजन रेड्डी ने कहा कि एक फरवरी को वित्त विधेयक पेश किए जाने के बाद से काफी परिदृश्य बदल गया है। वह पश्चिम एशिया में संघर्ष से पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र कर रहे थे।

रेड्डी ने रक्षा क्षेत्र में खर्च बढाए जाने की मांग करते हुए सुझाव दिया कि सरकार को रक्षा उपकर जैसे विकल्प पर विचार करना चाहिए। उन्होंने बिजली से चलने वाले वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की मांग की ताकि परंपरागत ईंधनों पर निर्भरता कम हो सके।

सपा के रामजीलाल सुमन ने कहा कि देश में गरीबों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है और उनके साथ इंसाफ नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश में मोदी की सरकार नहीं, बल्कि कुछ उद्योगपतियों की सरकार है।

उन्होंने कुछ उद्योगपतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ साल में उनकी संपत्ति में भारी वृद्धि हुई है और यह सरकार के संरक्षण के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ नहीं मिल रहा है और देश में सबसे अधिक किसानों का ही शोषण हो रहा है।

नेशनल कॉंफ्रेंस के सदस्य चौधरी मुहम्मद रमजान ने कहा कि जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री के पास कोई अधिकार नहीं है और उपराज्यपाल को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की मांग की।

बीआरएस सदस्य केआर सुरेश रेड्डी ने कहा कि हम वैश्विक अनिश्चितता के दौर में इस विधेयक पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भरोसा दिलाया है कि सरकार उभरती स्थिति के लिए तैयार है।

उन्होंने सरकार से देश में उर्वरकों की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले वादों को पूरा करने के लिए कानून बनाए जाने का भी सुझाव दिया।

भाजपा के सिकंदर कुमार ने कहा ‘‘मोदी सरकार ने विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच बेहतरीन संतुलन बनाया है। 2024-25 का चालू खाते का घाटा 4.9 फीसदी, 2025-26 का 4.4 फीसदी और इस वित्तीय वर्ष में 4.3 है जो बताता है कि हम आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज नहीं डालना चाहते।’’

उन्होंने कहा कि आंकड़े गवाह हैं, ‘‘हम अर्थव्यवस्था को गति देना चाहते हैं और विकास के नए आयाम रचना चाहते हैं। चाहे वह मेट्रो नेटवर्क हो या रक्षा गलियारे या मालभाड़ा गलियारा या रेलवे हो, हमें आगे बढ़ना है।’’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की फौजिया खान ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि नयी आयकर व्यवस्था को लेकर विधेयक में स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार, चार लाख से अधिक कर याचिकाएं लंबित हैं और आम आदमी अपनी परेशानियों के समाधान का इंतजार कर रहा है।

शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भाजपा साहसी कदम उठाने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना करती है लेकिन इजराइल ने जब ईरान पर हमला किया तो पहले ही दिन देश में गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए गए। ‘‘क्या यह साहसी कदम था? इसका बोझ किन पर पड़ेगा? आम आदमी ही परेशान होगा।’’

उन्होंने विधेयकों को बिना चर्चा के पारित किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि जब इस तरह विधेयक पारित किए जाएंगे तो सांसद आम लोगों की समस्याएं कहां रखेंगे?

तेदेपा के मस्तान राव बीधा यादव ने कहा कि वित्त विधेयक के प्रावधान वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए अधिक महत्वपूर्ण हैं और ये विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में भी मददगार होंगे।

चर्चा में माकपा सदस्य वी शिवदासन, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरै, बीजद के मानस रंजन मंगराज आदि ने भी भाग लिया।

भाषा अविनाश मनीषा

मनीषा


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