त्रिपुरा विधानसभा में मंत्री की माकपा विरोधी टिप्पणियों को लेकर हंगामा हुआ

त्रिपुरा विधानसभा में मंत्री की माकपा विरोधी टिप्पणियों को लेकर हंगामा हुआ

त्रिपुरा विधानसभा में मंत्री की माकपा विरोधी टिप्पणियों को लेकर हंगामा हुआ
Modified Date: August 27, 2026 / 06:36 pm IST
Published Date: August 27, 2026 6:36 pm IST

अगरतला, 27 अगस्त (भाषा) त्रिपुरा विधानसभा में बृहस्पतिवार को उस समय हंगामा हो गया, जब संसदीय कार्य मंत्री रतनलाल नाथ ने माकपा को ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’ और ‘‘विदेशी एजेंट’’ करार दिया जिसके बाद इस टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

प्रश्नकाल के तुरंत बाद नाथ ने क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सान एगुइलेरा की हालिया त्रिपुरा यात्रा का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय यात्रा के दौरान राजदूत ने किसी राजनीतिक दल के कार्यालय का दौरा नहीं किया, सिवाय माकपा के राज्य मुख्यालय के।

नाथ ने कहा कि 21 अगस्त को रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में क्यूबा के राजदूत ने अमेरिका के ‘‘औपनिवेशिक मानसिकता’’ के लिए उसकी आलोचना की और त्रिपुरा की हरियाली की अपने देश से तुलना की।

नाथ ने कहा, ‘कार्यक्रम में विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी को भी भारत की औपनिवेशिक मानसिकता पर खेद जताते हुए सुना गया, जबकि भारत ने कभी किसी देश पर कब्जा नहीं किया।’

नाथ ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान नहीं बजाए गए तथा राष्ट्रीय ध्वज के स्थान पर कागज का छोटा झंडा इस्तेमाल किया गया, जबकि बड़े आकार वाले क्यूबा के राष्ट्रीय ध्वज लगाए गए थे।

उनकी टिप्पणियों के बाद भाजपा और माकपा विधायकों के बीच तीखी बहस हुई। नाथ ने माकपा पर राष्ट्रवाद का अपमान करने का आरोप लगाया और उसके विधायकों से सदन से बाहर जाने को कहा। इस पर चौधरी ने पलटकर कहा, ‘‘आप कौन होते हैं मुझे यहां से जाने के लिए कहने वाले?’’

हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष रामपदा जमातिया ने सदन की बैठक दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी। हालांकि सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से शुरू हुई।

बाद में चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि नाथ ने विपक्ष को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाने के लिए उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने देश से प्यार और उसका सम्मान करते हैं लेकिन भाजपा और आरएसएस के तरीके से नहीं, जिनकी देश के स्वतंत्रता संग्राम में कोई भूमिका नहीं थी। आरएसएस ने 2002 तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया था। अब वे हमें राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

भाषा

राखी माधव

माधव


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