पूर्व सरकारों में भी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

पूर्व सरकारों में भी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

पूर्व सरकारों में भी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
Modified Date: July 28, 2026 / 02:58 pm IST
Published Date: July 28, 2026 2:58 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे की पृष्ठभूमि में सरकार ने मंगलवार को कहा कि पहले भी देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारों में परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक के मामले सामने आते रहे हैं तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार छात्रों के कल्याण की प्रति गहरी प्रतिबद्धता के साथ लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 लेकर आई है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़े प्रावधान वाले उक्त विधेयक को लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए सदन में पेश करते हुए यह बात कही।

सिंह ने सोमवार को यह विधेयक सदन में पेश किया था, लेकिन इस पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मंगलवार को गतिरोध समाप्त होने के बाद सदन में चर्चा शुरू हुई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विधेयक सरकार की छात्रों के कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता वाला है। उन्होंने कहा कि इसे भारतीय संसद के इतिहास में मील का पत्थर कहा जा सकता है।

उन्होंने कांग्रेस नीत पूर्ववर्ती सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक आदि की घटनाएं पहले भी होती रहीं हैं और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारों के दौरान ऐसे मामले सामने आते रहे हैं।

सिंह ने 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा, 2011 में अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा, इसी साल पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा, 2010 में उत्तर प्रदेश में बीएड प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी और 2012 में एम्स नयी दिल्ली प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का दावा करते हुए कहा कि यह सूची लंबी है।

विपक्ष की ओर से नीट प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का जिक्र किए जाने पर मंत्री ने कहा, ‘‘मैं उस पर भी आ रहा हूं। घटनाक्रम पर एक-एक करके बात कर रहा हूं। दुर्भाग्य से यह घटनाक्रम बहुत पहले शुरू हुआ था।’’

उन्होंने कहा कि सरकार को लगा कि इस संबंध में एक व्यापक कानून की जरूरत है।

सिंह ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा में परीक्षाओं का प्रबंधन करने के लिए एनटीए जैसी एजेंसी की सिफारिश 1992 और 2010 में भी की गई थी लेकिन ‘‘पता नहीं इस पर क्यों विचार नहीं किया गया। जो भी कारण और हित रहे हों।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का गठन 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ही किया।

सिंह ने कहा, ‘‘आपका (कांग्रेस का) अधूरा काम मोदी सरकार ने पूरा किया।’’

सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सरकार 2024 में ही विधेयक लाई थी जिसे जून 24 में लागू भी कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में आज के संशोधन विधेयक के माध्यम से कड़े प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं।

उन्होंने इस तरह के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का भी जिक्र किया जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ दिन पहले की थी।

सिंह ने कहा कि ये फास्ट ट्रैक अदालतें घटना रिपोर्ट दर्ज होने के पांच महीने के अंदर आखिरी निर्णय देंगी जो इस संशोधन विधेयक का बहुत महत्वपूर्ण पहलू है।

मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार की प्रतिबद्धता का इसी बात से अनुमान लगा सकते हैं कि इसी विधेयक के साथ ही कानून मंत्री ने प्रस्ताव जारी किया है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने की प्रक्रिया साथ ही शुरू की जाए।’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें पहले ही गठित की जा चुकी हैं और आने वाले दिनों में बाकी जगहों पर इनकी स्थापना होगी।

सिंह ने कहा, ‘‘सरकार की नीति ईमानदार है और यह संशोधन विधेयक भी ईमानदार प्रयास के तहत लाया जा रहा है।’’

भाषा वैभव माधव

माधव


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