नई दिल्ली। Water Crisis in Country: वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत के जल प्रबंधन तंत्र को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि यदि जल संसाधनों के प्रबंधन और वितरण में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में देश के कई हिस्सों में जल संकट गहरा सकता है। बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक विस्तार और कृषि क्षेत्र में भारी जल उपयोग के बीच पानी की उपलब्धता और मांग का अंतर लगातार बढ़ रहा है।
Water Crisis in Country: मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत में उपलब्ध मीठे पानी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र में उपयोग होता है। कई राज्यों में किसानों को सिंचाई और बिजली पर दी जा रही सब्सिडी सरकारों के वित्तीय बोझ को बढ़ा रही है। इसके साथ ही जल संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्यों के पास होने के कारण अलग-अलग नीतियां और प्राथमिकताएं एकीकृत जल प्रबंधन में बाधा बन रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि, घरेलू उपयोग और उद्योगों के बीच पानी के पुनर्वितरण की प्रक्रिया बेहद धीमी है। ऐसे में उन क्षेत्रों में संकट की आशंका अधिक है जहां शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। मूडीज ने चेतावनी दी है कि जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के बिना आर्थिक विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। देशभर में डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में सर्वर को ठंडा रखने और तकनीकी संचालन के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता पड़ती है। इससे पहले से सीमित जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन भी संकट को और गंभीर बना रहा है। अनियमित मानसून, सूखा और बाढ़ जैसी परिस्थितियां जल उपलब्धता को प्रभावित कर रही हैं। दूसरी ओर, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलापूर्ति तंत्र की कमजोरियां हालात को और चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
देश के प्रमुख महानगरों में इसके संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। मुंबई में जलाशयों का जलस्तर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है और मौजूदा भंडार शहर की जरूरतों के लिए करीब एक महीने तक ही पर्याप्त माना जा रहा है। वहीं दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को दिनों तक पानी नहीं मिल पा रहा है। कई इलाकों में 20 दिनों से पानी नहीं पहुंच रहा है। चेन्नई में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन गिरता भूजल स्तर भविष्य के लिए चेतावनी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक विकास, निवेश और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ा विषय बन चुका है। मूडीज की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यदि समय रहते जल प्रबंधन को लेकर ठोस और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए गए, तो भारत को आने वाले वर्षों में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।