नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) नक्सल रोधी अभियान ग्रिड में तैनात सुरक्षा बलों ने देश में वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के लिए तय केंद्र सरकार की 31 मार्च की समय सीमा में एक सप्ताह से भी कम समय शेष रहने के बीच बचे हुए हथियारबंद माओवादी कैडर को खत्म करने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है।
आधिकारिक सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि केंद्र सरकार ‘‘अभियान और घटनाक्रम’ का एक खाका भी तैयार कर रही है जिसमें इन क्षेत्रों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की पांच बटालियनों को वापस बुलाने और कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने की घोषणा शामिल होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की लगभग तीन से चार कोबरा इकाइयों को छत्तीसगढ़ से झारखंड भेजा जा रहा है ताकि पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगलों में विशेष अभियान चलाया जा सके।
इसी तरह, सूत्रों ने बताया कि सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की टीमों को छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में ‘फिर से तैनात’ किया जा रहा है, जिसका खास मकसद हथियारबंद माओवादी कैडरों के साथ मुठभेड़ करना या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है।
सूत्रों ने संकेत दिया कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा को शामिल करते हुए एक सीमा-पार अभियान पर भी काम चल रहा है।
सीएपीएफ के एक शीर्ष कमांडर ने कहा, ‘‘योजना यह है कि 31 मार्च तक हथियारबंद नक्सलियों को शत प्रतिशत निष्क्रिय कर दिया जाए; यह समय सीमा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषित की है। यह या तो मुठभेड़ों के जरिए होगा या फिर उनके आत्मसमर्पण से।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस उलटी गिनती के आखिरी 5-6 दिन में कुछ बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं।’’
सुरक्षा बल अब भी लगभग 130-150 हथियारबंद कैडरों, प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के दो सदस्यों और कुछ अन्य डिविजनल-रैंक के नक्सलियों पर नजर रख रहे हैं।
मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर के बारे में कहा जाता है कि वह झारखंड में सक्रिय है और कोबरा की टीमें उसकी और उसके साथियों की तलाश कर रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, रम्मन्ना—जिसे गणपति या लक्ष्मण राव के नाम से भी जाना जाता है—कथित तौर पर तेलंगाना पुलिस के संपर्क में है और 31 मार्च तक आत्मसमर्पण कर सकता है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बीएसएफ की लगभग तीन बटालियन, साथ ही डीआईजी-रैंक के अधिकारी के नेतृत्व वाले एक सेक्टर कार्यालय को कोरापुट जिले और ओडिशा के आस-पास के इलाकों से हटाए जाने की उम्मीद है।
सेक्टर कार्यालय राज्य के कंधमाल जिले में स्थानांतरित किया जा सकता है और तीनों बटालियनों को हालात की मांग के अनुसार सीमा सुरक्षा कर्तव्यों के लिए या मणिपुर भेजा जाएगा।
छत्तीसगढ़ से भी सीएपीएफ की कुछ बटालियन हटाई जाएंगी। इस संबंध में 31 मार्च को घोषणा होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस और छत्तीसगढ़ डीआरजी के कर्मी सीएपीएफ के शिविरों की कमान संभाल लेंगे।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को जगदलपुर में घोषणा की कि बस्तर का लगभग 96 प्रतिशत विशाल भौगोलिक क्षेत्र अब नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुका है।
सूत्रों ने बताया कि सीएपीएफ और राज्य पुलिस बलों से नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में छिपी बारूदी सुरंगों और बमों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाने को भी कहा गया है। यह अभियान अगले महीने से जोर पकड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार ‘ब्लैक कैट्स’ कमांडो बल एनएसजी और सीआरपीएफ के बम निरोधक दस्ते इस काम का नेतृत्व करेंगे।
फरवरी में गृह मंत्रालय ने नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों की नये सिरे से समीक्षा की और सूचित किया कि देश में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या सात है।
इन सात जिलों में छत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और दंतेवाड़ा, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम और ओडिशा का कंधमाल हैं।
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नौ राज्य, जिन्हें अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है, वे हैं – झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल।
भाषा वैभव नरेश
नरेश