पहचान छिपाने के लिए लश्कर का सबसे पुराना आतंकी अलग-अलग पेशे अपनाता रहा

पहचान छिपाने के लिए लश्कर का सबसे पुराना आतंकी अलग-अलग पेशे अपनाता रहा

पहचान छिपाने के लिए लश्कर का सबसे पुराना आतंकी अलग-अलग पेशे अपनाता रहा
Modified Date: April 20, 2026 / 06:38 pm IST
Published Date: April 20, 2026 6:38 pm IST

(सुमीर कौल)

श्रीनगर/नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) जम्मू-कश्मीर के बाहर आतंकी ठिकाने स्थापित करने का जिम्मा संभालने वाला लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग पेशे अपनाता रहा। वह कभी रसोइया, कभी प्लंबर, तो कभी पेंटर और इलेक्ट्रीशियन बनकर रहा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के सबसे पुराने आतंकी अब्दुल्ला ने देश के विभिन्न हिस्सों जैसे राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में अपने ठिकानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। पूछताछ के दौरान उसने इन राज्यों में अपने ठहरने का पूरा ब्योरा दिया और यह भी बताया कि स्थानीय लोगों के बीच घुलने-मिलने के लिए उसने कौन-कौन से पेशे अपनाए।

ये विवरण तब सामने आए जब श्रीनगर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के एक ‘गहरी पैठ वाले’ अंतरराज्यीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और अब्दुल्ला सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जो 16 साल से फरार था।

अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में छोटे-मोटे काम करने के बाद अब्दुल्ला, जिसने 2010 में उत्तरी हिस्से से जम्मू कश्मीर में घुसपैठ की थी, ने नलसाजी (प्लंबिंग) का काम शुरू कर दिया, क्योंकि उसे पाकिस्तान से इसके बारे में कुछ बुनियादी जानकारी थी।

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद रोधी ग्रिड में खरगोश’ के उपनाम से जाने जाने वाले उमर हारिस के संपर्कों से जुड़ाव के बाद, उसने एक आधार कार्ड और फिर एक स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की, ताकि वह अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान प्राप्त कर सके।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर गांव के निवासी अब्दुल्ला ने अपना ठिकाना अमृतसर स्थानांतरित करने का फैसला किया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने के डर से उसने ऐसा नहीं किया। उसकी पंजाबी बोली पर उसकी अच्छी पकड़ थी।

अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान और हरियाणा में पेंटर और इलेक्ट्रीशियन जैसे अन्य काम करने के बाद, अब्दुल्ला ने पंजाब के मलेरकोटला गांव में बसने का फैसला किया, जहां वह अपनी पंजाबी बोली में बात कर सकता था।

अधिकारियों ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के इस आतंकी ने कुछ समय के लिए ढाबा चलाया, इस दौरान उसने शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना सीखा। ढाबे से ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ, इसलिए उसने उसे बंद करने का फैसला किया, लेकिन तब तक वह यूट्यूब से शेयर बाजार में काफी अनुभव प्राप्त कर चुका था।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के समय उसके डीमैट खाते में 50,000 रुपये से अधिक का लाभ मार्जिन था और वह दूसरों को निवेश के टिप्स भी दे रहा था।

अब्दुल्ला को इस महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर उसके द्वारा बनाए गए संभावित नेटवर्क के बारे में उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

अब्दुल्ला और एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ ​​खुबैब की गिरफ्तारी श्रीनगर पुलिस के लिए एक और बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह कार्रवाई नवंबर 2025 में लाल किला के पास विस्फोट से जुड़े फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय के “सफेदपोश” आतंकी मॉड्यूल के ध्वस्त किए जाने के छह महीने बाद सामने आई है।

अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान अब्दुल्ला ने अपने और हारिस उर्फ “खरगोश” के भारत भर में खासकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में फैले नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उसने यह भी बताया कि फरार आतंकियों में से एक ने कश्मीर में एक आतंकी समर्थक की बेटी से शादी की थी।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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