न्यायाधिकरण ने एनएससीएन (के) पर पांच साल के प्रतिबंध की पुष्टि की

न्यायाधिकरण ने एनएससीएन (के) पर पांच साल के प्रतिबंध की पुष्टि की

न्यायाधिकरण ने एनएससीएन (के) पर पांच साल के प्रतिबंध की पुष्टि की
Modified Date: April 1, 2026 / 12:29 am IST
Published Date: April 1, 2026 12:29 am IST

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण ने केंद्र द्वारा नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खापलांग) या एनएससीएन (के), और उसके सभी गुटों, संबद्ध संगठनों पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध की पुष्टि की है। मंगलवार को जारी एक आदेश से यह जानकारी मिली।

पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति नेल्सन सैलो ने 19 मार्च को अपने आदेश में फैसला सुनाया कि एनएससीएन (के) की गतिविधियां ‘भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक’ हैं और इनका उद्देश्य ‘भारत से अलग होना’ है। इसकी अधिसूचना मंगलवार को प्रकाशित हुई।

आदेश में कहा गया है कि संगठन, उसके कार्यकर्ताओं और गुटों द्वारा की गई गतिविधियों की प्रकृति से ‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि एनएससीएन (के) भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है।’’

केंद्र सरकार ने 28 सितंबर, 2025 से पांच साल की अवधि के लिए इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 के तहत प्रावधान है कि यदि किसी संगठन को अवैध घोषित किया जाता है, तो केंद्र सरकार को अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों के भीतर उसे न्यायाधिकरण के पास भेजना होता है, ताकि यह तय किया जा सके कि संगठन को अवैध घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं। इसी के अनुरूप, यह मामला न्यायाधिकरण को भेजा गया।

भाषा आशीष अमित

अमित


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