रीताब्रता को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने का फैसला संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ: तृणमूल कांग्रेस
रीताब्रता को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने का फैसला संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ: तृणमूल कांग्रेस
कोलकाता, 11 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायक रीताब्रता बनर्जी को सदन में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के फैसले को चुनौती देते हुए, तृणमूल कांग्रेस नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने बृहस्पतिवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से कहा कि यह कदम संविधान के मूल ढांचे पर चोट करता है।
चट्टोपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने न्यायमूर्ति कृष्णा राव के सामने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभाध्यक्ष को चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के पार्टी के फ़ैसले के बारे में जानकारी दे दी थी।
उन्होंने दलील दी कि ऐसा फैसला लेने का अधिकार विधायक दल नहीं, बल्कि राजनीतिक दल को है और विधानसभाध्यक्ष राजनीतिक दल द्वारा किए गए चयन को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं। बनर्जी ने अदालत में कहा, ‘‘विधानसभाध्यक्ष का कदम संविधान के मूल ढांचे पर चोट करता है।’’
चट्टोपाध्याय और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने विधानसभाध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें 57 अन्य टीएमसी विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले रीताब्रता बनर्जी को अलग हुए गुट का नेता नियुक्त किया गया और विधानसभा में उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई है।
याचिकाकर्ताओं ने विधानसभाध्यक्ष के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें अलग हुए गुट के एक अन्य नेता संदीपन साहा को मुख्य सचेतक के रूप में मान्यता दी गई है।
विधानसभाध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि विधानसभा का सत्र 18 जून को आहूत किया गया है।
विधानसभाध्यक्ष के वकील बिलवदल भट्टाचार्य ने याचिका में उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के लिए हलफनामा दाखिल करने के संबंध में समय मांगा।
न्यायमूर्ति राव ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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