तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा का सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार करने का आह्वान किया
तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा का सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार करने का आह्वान किया
कोलकाता, छह मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘‘सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार’’ का शुक्रवार को आह्वान किया और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर के माध्यम से एक करोड़ से अधिक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास करने का निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया।
अभिषेक बनर्जी ने यहां के मध्य क्षेत्र में स्थित मेट्रो चैनल के मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पहले के ‘‘भाजपा को वोट नहीं’’ के नारे से आगे बढ़कर भाजपा को सामाजिक रूप से अलग-थलग किया जाए।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से कथित तौर पर मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में शुक्रवार को यहां धरना शुरू किया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘‘कुछ नागरिक समाज संगठनों ने 2021 में ‘भाजपा को वोट न देने’ का आह्वान किया था। आज, बंगाल की 10 करोड़ जनता के सामने, हम कहते हैं कि भाजपा का बहिष्कार किया जाना चाहिए। सामाजिक और राजनीतिक रूप से उनका बहिष्कार करें।’’
उन्होंने भाजपा को ‘‘सांपों की पार्टी बताया जिसे राजनीतिक रूप से खत्म किया जाना चाहिए’’ और आरोप लगाया कि पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने के लिए मतदाता सूचियों में हेरफेर करने की कोशिश की जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता ने दावा किया कि एसआईआर कवायद के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और लाखों मतदाताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मसौदा सूची से पहले ही 58 लाख नाम हटाए जा चुके थे और 28 फरवरी तक यह संख्या बढ़कर लगभग 63-64 लाख हो गई।
राज्य में 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से मतदाताओं की संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है।
इसके अतिरिक्त 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘‘न्यायिक जांच के अधीन’’ श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जो निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर चुनावी समीकरणों को बदल सकती है।
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह कदम मतदाता सूची में ‘तार्किक विसंगतियों’ के माध्यम से मतदाताओं को हटाने की ‘षड्यंत्र’ का हिस्सा है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा, ‘‘उन्होंने सोचा था कि लगभग एक करोड़ नाम हटाकर वे चुनाव चुरा सकते हैं। लेकिन बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) ने उन्हें पकड़ लिया।’
तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने कहा, ‘‘हमें इसके लिए उसी तरह लड़ना होगा जैसे हमने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। जब तक इन 60 लाख लोगों को उनका उचित मतदान अधिकार नहीं मिल जाता, तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नेतृत्व में सड़कों पर उतरती रहेगी।’’
बनर्जी ने ‘‘न्यायिक जांच के अधीन’’ श्रेणी को लेकर निर्वाचन आयोग से सवाल भी किया।
भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अक्सर अपने भाषणों में उनका जिक्र करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वे मुझसे बहुत नाराज हैं। जब भी अमित शाह बंगाल आते हैं, अपने भाषण की शुरुआत से लेकर अंत तक वह मेरे बारे में ही बात करते हैं।’’
भाजपा नेता सजल घोष द्वारा एक पॉडकास्ट में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को कथित तौर पर ‘दलाल’ बताये जाने पर अभिषेक बनर्जी ने पूछा, ‘‘यदि सौरव दलाल है, तो अमित शाह 2021 में शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष के साथ उनके (सौरव) बेहाला स्थित घर पर क्यों गए और वहां लूची और आलू दम क्यों खाया?’’
उन्होंने कहा कि गांगुली ने ‘‘अपना सिर इसलिए नहीं झुकाया क्योंकि उन्हें बंगाली होने पर गर्व है’’।
‘‘लूची और आलू दम’’ एक विशिष्ट बंगाली व्यंजन है।
बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों के साथ कल्याणकारी योजनाओं की तुलना करते हुए पार्टी को तृणमूल कांग्रेस सरकार की महिलाओं के लिए चलाई जा रही प्रमुख लक्ष्मी भंडार वित्तीय सहायता योजना को दोहराने की चुनौती दी।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा असम, त्रिपुरा, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में सत्ता में है। क्या वे बिना किसी शर्त के 2.5 करोड़ महिलाओं को लक्ष्मी भंडार उपलब्ध करा सकते हैं। अगर वे ऐसा कर सकते हैं, तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा।’’
ये टिप्पणियां मतदाता सूची में संशोधन को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ते टकराव के बीच आई हैं, जिसे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने ‘बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने’ का प्रयास बताया है।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव

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