तृणमूल ने निर्वाचन आयोग को पदाधिकारियों की सूची भेजी, ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष बताया

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तृणमूल ने निर्वाचन आयोग को पदाधिकारियों की सूची भेजी, ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष बताया

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 12:06 PM IST,
    Updated On - June 23, 2026 / 12:06 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में लगभग 20 सांसदों के विद्रोह और कुछ विधायकों की समान गतिविधियों के बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्यों की एक नयी सूची निर्वाचन आयोग को भेजी है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि ममता बनर्जी अब भी पार्टी की मुखिया हैं।

सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि निर्वाचन आयोग को सौंपी गई सूची में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का ज़िक्र ‘‘20 जून, 2026 तक’’ की स्थिति के अनुसार किया गया है। पार्टी पर नियंत्रण को लेकर जारी दावों के बीच, इस सूची के ज़रिए पार्टी के आधिकारिक पदानुक्रम को रिकॉर्ड पर लाया गया है।

सूची के अनुसार, ममता बनर्जी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष हैं, जबकि सुभ्रत बक्शी उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव हैं।

पदाधिकारियों की सूची में राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव तथा सुभाषीश चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है।

राष्ट्रीय कार्यसमिति में ममता बनर्जी, सुभ्रत बक्शी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और सुभाषीश चक्रवर्ती शामिल हैं।

इसके अलावा अन्य सदस्यों में चंद्रिमा भट्टाचार्य, अमित मित्रा, राजेश पति त्रिपाठी, असिमा पात्रा, मोलॉय घटक, गौतम देव, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, बुलु चिक बराइक, मुकुल संगमा, बाइसवानोर चट्टोपाध्याय, बीरबहा हांसदा, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, नदीमुल हक, मदन मित्रा, बिमान बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कुणाल घोष शामिल हैं।

चंद्रिमा भट्टाचार्य को राष्ट्रीय कार्यसमिति की सदस्य के साथ-साथ पश्चिम बंगाल टीएमसी अध्यक्ष के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है, जबकि शोभनदेव चट्टोपाध्याय का नाम सदस्य और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता के रूप में दर्ज किया गया है।

निर्वाचन आयोग को यह सूची सौंपे जाने के एक दिन पहले, टीएमसी के एक बागी गुट ने कोलकाता में एक विशेष सत्र आयोजित कर एक समानांतर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की, जिसमें वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा भी शामिल है। यह कदम सीधे तौर पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।

विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले इस गुट ने दावा किया कि यह कदम पार्टी में उत्पन्न ‘संवैधानिक संकट’ के कारण आवश्यक हो गया था। उनका तर्क था कि फरवरी 2022 में गठित पिछली राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

बागी खेमे ने कहा कि यह विशेष सत्र टीएमसी के संविधान के अनुसार आयोजित किया गया, जिसमें एक नई राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की गई तथा नए पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की गई। उसने यह भी कहा कि इस पूरी कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को दी जाएगी।

हालांकि, ममता बनर्जी खेमे ने इस पूरी कवायद को खारिज कर दिया। वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी नेताओं के पास न तो ऐसा सत्र बुलाने का अधिकार है और न ही पार्टी की संगठनात्मक संरचना में बदलाव करने की वैधता।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा