त्रिपुरा डीजीपी मौत मामला: माकपा प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला, अदालत की निगरानी में जांच की मांग

त्रिपुरा डीजीपी मौत मामला: माकपा प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला, अदालत की निगरानी में जांच की मांग

त्रिपुरा डीजीपी मौत मामला: माकपा प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला, अदालत की निगरानी में जांच की मांग
Modified Date: July 27, 2026 / 04:39 pm IST
Published Date: July 27, 2026 4:39 pm IST

अगरतला, 27 जुलाई (भाषा) त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राज्यपाल एन. इंद्रसेना रेड्डी से मुलाकात की और पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ की मौत के मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच का अनुरोध किया।

धनखड़ ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े कथित 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की सीबीआई जांच और 1984 के सिख-विरोधी दंगों की दोबारा जांच का नेतृत्व किया था। उनका शव 20 जुलाई को यहां राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके कक्ष से जुड़े वॉशरूम में फंदे से लटका हुआ मिला था।

माकपा की राज्य इकाई के सचिव जितेंद्र चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी तरह देशभर के लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि धनखड़ जैसा अधिकारी, जिसने सीबीआई में कई हाई-प्रोफाइल मामलों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया, राज्य के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान यानी अपने कार्यालय कक्ष में आत्महत्या कर सकता है। उनका शव पूरी वर्दी में उनके कक्ष से जुड़े वॉशरूम में मिला था। वहीं उनकी टोपी फर्श पर पड़ी हुई थी।

उन्होंने दावा किया कि घटना से बमुश्किल एक घंटा पहले, पुलिस मुख्यालय में एक साप्ताहिक रस्म के तहत धनखड़ को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया था और उनके चेहरे पर तनाव या दबाव का कोई संकेत नहीं था।

चौधरी ने कहा, ‘‘त्रिपुरा के 44 लाख लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला अधिकारी इस तरह से अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेगा? आत्महत्या की बात पर सवाल उठाने के उचित आधार हैं।’’

उन्होंने कहा कि माकपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह धनखड़ के परिवार को न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच का आदेश दें।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक के नेतृत्व वाली तीन-सदस्यीय टीम द्वारा मामले की जांच किए जाने पर हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पूरी जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए।’’

भाषा शोभना सुरेश

सुरेश


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