मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में त्रिपुरा को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी: साहा
मोदी के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में त्रिपुरा को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी: साहा
अगरतला, 21 जनवरी (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्वोत्तर राज्य को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
त्रिपुरा के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी ने स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के लिए प्रयुक्त शब्द ‘अष्टलक्ष्मी’ में से एक त्रिपुरा को प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। यदि ये राज्य अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं, तो लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा।”
साहा ने मिजोरम और गोवा के बाद त्रिपुरा के तीसरे पूर्णतः साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि पर प्रकाश डाला और कहा कि यह राज्य पूर्वोत्तर में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल नयी दिल्ली में आयोजित ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट शिखर सम्मेलन’ के दौरान किए गए 30,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश वादों में से त्रिपुरा को 15,800 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है। निवेशकों ने राज्य की वास्तविक क्षमता और कानून की अच्छी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे चुना है।’’
साहा ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2018 में 198 किलोमीटर से बढ़कर वर्तमान में 923 किलोमीटर हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2018 से पहले राज्य में केवल एक राष्ट्रीय राजमार्ग था, जिसकी लंबाई 198 किलोमीटर थी, लेकिन अब यहां छह राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जिनकी कुल लंबाई 923 किलोमीटर है। एक सौ अठानवे किलोमीटर लंबा असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग चार लेन का होगा, जिससे राज्य की जीवनरेखा कहे जाने वाले इस मार्ग पर यातायात सुचारू रूप से चल सकेगा।’’
साहा ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्य में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के विकास से ग्रामीण आजीविका को मिलने वाले अवसरों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
उन्होंने कहा, ‘‘एसएचजी की संख्या 2018 में 6,000 से बढ़कर 2025 में 54,363 हो गई है। हमने 700 करोड़ रुपये का एक परिचालित कोष (रिवॉल्विंग फंड) तैयार किया है। साथ ही, 1.18 लाख के कुल लक्ष्य में से 1.08 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। एसएचजी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं”
एसएचजी त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (टीआरएलएम) के अंतर्गत कार्यरत हैं।
साहा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी व्यापक विकास हुआ है और नए चिकित्सा संस्थान स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर स्थित एक स्वास्थ्य संगठन राज्य में एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए 900 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। राज्य में एमबीबीएस सीटों की संख्या भी बढ़कर 450 हो गई है और यह संख्या आगे भी बढ़ेगी।’
भाषा
राखी सुरेश
सुरेश


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