त्रिपुरा: आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों ने रेल-सड़क नाकेबंदी वापस ली

त्रिपुरा: आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों ने रेल-सड़क नाकेबंदी वापस ली

त्रिपुरा: आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों ने रेल-सड़क नाकेबंदी वापस ली
Modified Date: September 5, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: September 5, 2026 9:48 pm IST

अगरतला, पांच सितंबर (भाषा) त्रिपुरा में आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के एक समूह ने शनिवार शाम हड़ताल के दूसरे दिन अपनी 72 घंटे की रेल और सड़क नाकेबंदी समाप्त कर दी। यह फैसला राज्य सरकार के इस आश्वासन के बाद लिया गया कि उनकी मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जायेगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

त्रिपुरा में हथियार डाल चुके सात उग्रवादी संगठनों की ओर से त्रिपक्षीय शांति समझौते को लागू करने सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर बुलाई गई 72 घंटे की हड़ताल के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में रेल सेवाएं और वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।

प्रदर्शनकारियों ने ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ के बैनर तले पश्चिम त्रिपुरा जिले के हतईकोतोर, ब्रिगुदासबारी और खोवाई चौमुहानी में सड़कें अवरुद्ध कर दी थीं।

प्रदर्शनकारी पश्चिम त्रिपुरा के ब्रिगुदासबारी में रेल की पटरियों पर बैठ गए, जिसके कारण पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) को लंबी दूरी की रेलगाड़ियों समेत कई रेलगाड़ियों को आंशिक रूप से और कुछ को पूरी तरह रद्द करने के साथ-साथ कई रेलगाड़ियों के समय में बदलाव की घोषणा करनी पड़ी थी।

मुख्यमंत्री माणिक साहा के नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के साथ बैठक में शामिल होने के बाद राज्य लौटने पर नाकेबंदी हटा ली गई।

पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी विशाल कुमार ने कहा, “हथियार डाल चुके उग्रवादी समूहों के नेताओं के साथ उनकी मांगों को लेकर गहन चर्चा के बाद वे नाकेबंदी समाप्त करने पर सहमत हो गए। सरकार उनके द्वारा उठाई गई सभी मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करेगी।”

हथियार डाल चुके सात उग्रवादी गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ ने 2024 में हस्ताक्षरित शांति समझौते को लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को 72 घंटे की हड़ताल शुरू की थी। इस समझौते के तहत उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के समक्ष हथियार डाले थे।

संगठन की 11 सूत्री मांगों में मूल निवासियों के लिए भूमि अधिकार सुनिश्चित करना और हथियार डाल चुके उग्रवादियों के खिलाफ लंबित सभी मामले वापस लेना शामिल हैं।

इससे पहले दिन में, विपक्षी दलों ने राज्य की भाजपा सरकार से आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के साथ बातचीत कर उनका विरोध प्रदर्शन समाप्त कराने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि इस हड़ताल के कारण राज्य के आम लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

पूर्व विद्रोही नेता जीवनजॉय रियांग ने कहा, ‘‘हमने सरकार से हमारे पुनर्वास के लिए कोई समाधान निकालने की अपील की थी, अन्यथा आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी अनिश्चितकालीन नाकेबंदी करेंगे। हम अपनी आजीविका से जुड़े मुद्दों को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे।’’

वाममोर्चा के संयोजक माणिक डे ने कहा कि सरकार को शांति समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि सरकार को नाकेबंदी खत्म करने के लिए आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के साथ बातचीत करनी चाहिए।

कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने भी शांति समझौते में किए गए वादों को पूरा करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे आंदोलनों का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।’’

भाषा देवेंद्र रंजन

रंजन


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