पहाड़ी आरक्षण के विस्तार के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों का विधानसभा से बहिर्गमन

पहाड़ी आरक्षण के विस्तार के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों का विधानसभा से बहिर्गमन

पहाड़ी आरक्षण के विस्तार के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों का विधानसभा से बहिर्गमन
Modified Date: February 12, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: February 12, 2026 2:51 pm IST

जम्मू, 12 फरवरी (भाषा) मैदानी इलाकों में रहने वाले पाकिस्तानी शरणार्थियों सहित पात्र समुदाय के सदस्यों को पहाड़ी कोटे के तहत आरक्षण का विस्तारित लाभ देने के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों ने बृहस्पतिवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा से बहिर्गमन किया।

नरिंदर सिंह रैना और अरविंद गुप्ता ने सदन से बहिर्गमन किया, क्योंकि वे जम्मू और अन्य मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले पहाड़ी समुदाय के सदस्यों को आरक्षण लाभ देने के संबंध में सरकार की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं थे।

इस विषय पर रैना द्वारा उठाए गए मुख्य प्रश्न का उत्तर देते हुए समाज कल्याण मंत्री सकीना इटू ने कहा कि अनुसूचित जनजाति-2 लाभों का विस्तार जातीय पहचान पर आधारित है, न कि क्षेत्रीय विचारों पर, जिसमें पहाड़ी भाषी लोग भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजाति-1 आरक्षण (गुर्जरों और बकरवालों के लिए) समान रूप से लागू है। अनुसूचित जनजाति-2 श्रेणी के तहत आरक्षण क्षेत्र-आधारित या क्षेत्र विशिष्ट नहीं है, बल्कि विभिन्न समूहों को पहाड़ी जातीयता के आधार पर दिया जाता है।’’

इस मुद्दे को लेकर भाजपा सदस्यों और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक एजाज जान के बीच तीखी बहस हुई। एजाज ने पहाड़ी क्षेत्रों के बाहर रहने वाले पहाड़ी परिवारों को आरक्षण का लाभ देने के किसी भी विस्तार का कड़ा विरोध किया।

पत्रकारों से बात करते हुए रैना ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अनुसूचित जनजाति (एसटी-1) के सदस्यों को उनके निवास स्थान की परवाह किए बिना आरक्षण के लाभ प्राप्त करने का अधिकार है, तो यही सिद्धांत पहाड़ी भाषी लोगों पर भी लागू होना चाहिए।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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