नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर कोलकाता में प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में दो और लोग गिरफ्तार

नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर कोलकाता में प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में दो और लोग गिरफ्तार

नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर कोलकाता में प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में दो और लोग गिरफ्तार
Modified Date: July 27, 2026 / 04:26 pm IST
Published Date: July 27, 2026 4:26 pm IST

कोलकाता, 27 जुलाई (भाषा) कोलकाता पुलिस ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में निकाले गए मार्च के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में सोमवार को दो और लोगों को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या अब 16 हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा कि कोलकाता के गार्डन रीच और पार्क सर्कस इलाकों से दो आरोपियों को पकड़ा गया।

अधिकारी ने कहा कि अपराध के घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए गिरफ्तार पांच लोगों को जांच के तहत सोमवार को फिर से एस्प्लेनेड के डोरिना क्रॉसिंग ले जाया गया।

जांच अधिकारियों ने जब अपराध के घटनाक्रम को फिर से दोहराया तो आरोपियों को पुलिस की सुरक्षा में नंगे पैर उस जगह तक ले जाते हुए देखा गया।

कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘अपराध के घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और उसकी पुष्टि करने तथा हर आरोपी की अलग-अलग भूमिका का पता लगाने के लिए अपराध के घटनाक्रम को फिर से दोहराया गया। सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है, जिसमें वीडियो फुटेज, डिजिटल सामग्री और गवाहों के बयान शामिल हैं। अगर और लोगों की भूमिका का पता चलता है तो और गिरफ्तारियां की जाएंगी।’’

पुलिस ने हाल में गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान पार्क सर्कस के कड़ेया इलाके के रहने वाले 35 साल के वकार आजम और गार्डन रीच के पास नाडियाल थाना क्षेत्र के 32 साल के जावेद अख्तर के तौर पर की है। जांच अधिकारियों का आरोप है कि शुक्रवार को हुए प्रदर्शन मार्च के दौरान हिंसा और तोड़-फोड़ में दोनों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था।

अधिकारी ने बताया कि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच के तहत मौके पर ले जाए गए पांच आरोपियों में मोहम्मद अफरोज भी शामिल था।

इससे पहले, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों का विधानसभा में जिक्र करते हुए अफरोज का नाम लिया था।

पुलिसकर्मी ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान चार अन्य आरोपी भी मौजूद थे और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पहले से सोची-समझी साजिश थी।

राज्य सरकार ने दावा किया है कि हिंसा के सिलसिले में कम से कम 70 लोगों की पहचान की गई है जो न तो छात्र थे और न ही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सदस्य। साथ ही, नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ जारी आंदोलन से उनका कोई सीधा संबंध नहीं था।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। हम तोड़-फोड़, मारपीट या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल हर व्यक्ति की पहचान कर रहे हैं। दोषी पाए जाने पर किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी संगठन से जुड़ा हो।’’

राज्य सरकार ने इस मामले में हाल में लागू ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026’ के प्रावधानों को लागू किया है।

हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नए कानून के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और वामपंथी विचारधारा वाले अन्य छात्र संगठनों ने विरोध मार्च निकाला था। कॉजपा ने भी कोलकाता में एक अलग जनसभा आयोजित की थी।

प्रदर्शन को कवर कर रहे कई पत्रकारों पर हमले किए गए और उन पर जूते और बोतलें फेंकी गईं।

जांच अधिकारियों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर भी हमले की कोशिशें की गईं।

हिंसा के सिलसिले में हारे स्ट्रीट और एंटली थानों में कुल सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


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