गुजरात में परित यूसीसी विधेयक असंवैधानिक और मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ : ओवैसी

गुजरात में परित यूसीसी विधेयक असंवैधानिक और मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ : ओवैसी

गुजरात में परित यूसीसी विधेयक असंवैधानिक और मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ : ओवैसी
Modified Date: April 4, 2026 / 08:11 pm IST
Published Date: April 4, 2026 8:11 pm IST

(तस्वीर के साथ)

अहमदाबाद, चार अप्रैल (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को कहा कि गुजरात विधानसभा द्वारा हाल ही में पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक और अशांत क्षेत्र अधिनियम में संशोधन असंवैधानिक हैं।

गुजरात विधानसभा ने पिछले सप्ताह सात घंटे से अधिक चली लंबी बहस के बाद यूसीसी विधेयक पारित किया, जिसका उद्देश्य धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) को विनियमित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।

इसमें बल, दबाव या धोखाधड़ी से किए गए विवाहों के लिए सात साल कारावास की सजा का प्रावधान है, साथ ही जीवनसाथी के जिंदा रहते दूसरी शादी पर रोक लगाई गईहै। विधेयक में विवाह और सह-जीवन संबंध का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

विधानसभा ने गुजरात अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक और किरायेदारों को परिसर से बेदखली से सुरक्षा प्रदान करने संबंधी अधिनियम 1991 में संशोधन का विधेयक भी पारित किया।

ओवैसी ने कहा, ‘‘यूसीसी एक नीति निर्देशक सिद्धांत है, मौलिक अधिकार नहीं। इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है। संविधान सभा की बहस के दौरान बाबासाहेब आंबेडकर ने यह नहीं कहा था कि संहिता बनने के बाद राज्य इसे सभी नागरिकों पर लागू करेगा। यह संहिता केवल उन लोगों पर लागू होगी जो घोषणा करते हैं और स्वेच्छा से इसके पालन के लिए सहमत होते हैं।’’

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह विधेयक उत्तराखंड में पारित विधेयक की हूबहू नकल है, जिसमें हिंदू विवाह तथा तलाक अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम को अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर सभी समुदायों पर लागू किया गया है, इसलिए यह एक समान विधेयक नहीं है।

ओवैसी ने कहा, ‘‘ यह मुसलमानों के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। पीड़ित पक्ष मुसलमान हैं। यह असंवैधानिक है। अगर अब किसी को तलाक लेना हो, तो उन्हें व्यभिचार साबित करना होगा और न्यायिक हिरासत में रहना होगा। यह सब हिंदू धर्म का हिस्सा है। आप इसे हम (मुसलमानों) पर क्यों लागू कर रहे हैं?’’

हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने सह-जीवन से संबंधित प्रावधानों की भी कड़ी आलोचना की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सवाल किये। उन्होंने दलील दी कि यह विवाह की पवित्रता को नष्ट करता है और इस्लाम के खिलाफ है।

एआईएमआईएम अध्यक्ष ने कहा कि गुजरात के अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर प्रतिबंध और परिसर से किरायेदारों को बेदखली से बचाने के प्रावधान संबंधी अधिनियम 1991 में संशोधन करने वाले विधेयक में ‘‘पीड़ित व्यक्ति’’ की परिभाषा स्पष्ट की गई है, जिसमें न केवल संपत्ति के खरीदार और विक्रेता शामिल हैं, बल्कि अधिसूचित निर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर रहने वाला कोई भी निवासी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब, कोई तीसरा व्यक्ति भी निर्दिष्ट क्षेत्र में किसी भी संपत्ति सौदे के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। ‘पीड़ित व्यक्तियों’ की इस परिभाषा से भाजपा ने किसी भी व्यक्ति द्वारा कमीशन लेने को वैध बना दिया है। उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों को देखते हुए, यह असंवैधानिक है।’’

ओवैसी ने कहा, ‘‘भाजपा का दावा है कि गुजरात एक शांतिपूर्ण राज्य है। अगर यह वास्तव में शांतिपूर्ण होता, तो ऐसे संशोधन की आवश्यकता ही नहीं होती।’’

उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम गुजरात में आगामी निकाय चुनाव में छह नगर निगमों, 29 तालुका पंचायतों और 28 जिला पंचायतों में चुनाव लड़ेगी और 539 उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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