संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम बंगाल की ‘मातिर सृष्टि’ पहल और सुगंधित चावलों को मान्यता दी: ममता

संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम बंगाल की 'मातिर सृष्टि' पहल और सुगंधित चावलों को मान्यता दी: ममता

संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम बंगाल की ‘मातिर सृष्टि’ पहल और सुगंधित चावलों को मान्यता दी: ममता
Modified Date: February 18, 2026 / 06:43 pm IST
Published Date: February 18, 2026 6:43 pm IST

कोलकाता, 18 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण के लिए राज्य सरकार के समुदाय आधारित ‘मातिर सृष्टि’ पहल को मान्यता देते हुए एक अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एफएओ ने राज्य की सुगंधित चावल की तीन किस्मों को भी मान्यता दी है।

उन्होंने बताया कि ‘मातिर सृष्टि’ पहल 2020 में शुरू की गई और इसके तहत राज्य सरकार ने एक अनूठा दृष्टिकोण तैयार किया है, जिसमें भूमि, सिंचाई और पंचायतों से जुड़ी रणनीतियों को एकीकृत किया गया है।

बनर्जी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह साझा करते हुए गर्व हो रहा है कि संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर हमारी पहल को मान्यता दी है। एफएओ ने हमारे ‘मातिर सृष्टि’ कार्यक्रम में सामुदायिक पहलों के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्र प्रदान किया है।’

उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य बंजर, अनुपयोगी, शुष्क और एक ही फसल वाली भूमि को अंततः उपजाऊ बनाना है इसी के साथ उसे बागवानी और सब्जी की खेती सहित कई फसलों को उगाने के लिए उपयुक्त बनाना रहा है।

बनर्जी ने कहा, ‘तालाबों और अन्य सिंचाई स्रोतों जैसी नयी सुविधाएं विकसित कर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित की गई है। इससे लाखों लोगों के लिए आजीविका के अवसर पैदा हुए हैं और परिवारों की आय में कई गुना वृद्धि हुई है।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे यह बताते हुए और भी खुशी हो रही है कि संयुक्त राष्ट्र (एफएओ) ने पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध गोविंदभोग, तुलाईपांजी और कनकचूर सुगंधित चावल को खाद्य एवं संस्कृति विरासत के रूप में भी मान्यता दी है।’

बनर्जी ने एफएओ के महानिदेशक से प्राप्त मान्यता प्रमाणपत्र साझा करते हुए कहा, ‘हम इस सम्मान को अपने पूरे ग्रामीण समुदाय, विशेषकर बंगाल के किसानों को समर्पित करते हैं।’

भाषा प्रचेता माधव

माधव


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